यूपी में SC-ST Act की राहत राशि के दुरुपयोग की होगी जांच, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिए प्रदेशव्यापी जांच के संकेत
झांसी के मामलों में 23.36 लाख रुपये राहत राशि मिलने का मामला, डीएम-एसएसपी को तीन महीने में निष्पक्ष जांच के निर्देश
प्रयागराज। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC-ST) अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत पीड़ितों को दी जाने वाली आर्थिक राहत राशि के संभावित दुरुपयोग को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने कहा कि राहत योजना का लाभ वास्तविक पीड़ितों तक पहुंचना चाहिए और ऐसे मामलों पर प्रभावी निगरानी तंत्र विकसित किया जाना जरूरी है, जिनमें बार-बार राहत राशि का दावा किया जा रहा है।
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की एकल पीठ ने झांसी से संबंधित मामलों में जांच के निर्देश दिए हैं। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को राहत राशि के वितरण और उसके दावों की निष्पक्षता की जांच करने को कहा है।
राहत राशि के भुगतान को लेकर उठे सवाल
यह मामला झांसी के अरविंद कुमार और दो अन्य तथा संतोष कुमार दोहरे की आपराधिक अपीलों से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान अपीलकर्ताओं की ओर से कहा गया कि विवेचक ने प्रत्येक पीड़ित के लिए दो लाख रुपये की राहत राशि का प्रस्ताव भेजा था।
नियमों के तहत चार्जशीट दाखिल होने तक राहत राशि का 75 प्रतिशत यानी 1.50 लाख रुपये दिए जाने का प्रावधान बताया गया। हालांकि, जिला समाज कल्याण अधिकारी की ओर से केवल 75 हजार रुपये जारी किए गए। शेष राशि के भुगतान के लिए दिए गए प्रत्यावेदनों पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया।
विशेष अदालत की भूमिका पर हाईकोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि SC-ST Act के तहत गठित विशेष अदालत महज औपचारिक संस्था नहीं है। नियम 12(7) के तहत अदालत पीड़ित को मिलने वाली राहत की स्थिति की जांच कर सकती है।
कोर्ट ने कहा कि विशेष अदालत यह सुनिश्चित कर सकती है कि पीड़ित को निर्धारित समय पर पर्याप्त आर्थिक राहत मिली या नहीं। आवश्यकता होने पर अदालत बकाया राहत राशि के भुगतान का आदेश भी दे सकती है।
एक परिवार को 23.36 लाख रुपये राहत राशि मिलने का मामला
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि संतोष कुमार दोहरे और उनके परिवार को अलग-अलग आपराधिक मामलों में अब तक कुल 23,36,250 रुपये की राहत राशि दी जा चुकी है।
सरकार के अनुसार, ऐसे 10 से 12 मामले अभी जिला स्तरीय समिति के समक्ष लंबित हैं। राहत राशि के बार-बार दावों और भुगतान की स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया।
डीएम और एसएसपी तीन महीने में करेंगे जांच
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झांसी के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को संबंधित मामलों तथा अब तक दी गई राहत राशि की तीन महीने के भीतर निष्पक्ष जांच पूरी करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या गड़बड़ी सामने आती है तो केवल संबंधित व्यक्तियों ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
छह सप्ताह में विशेष अदालत को करना होगा नए सिरे से फैसला
हाईकोर्ट ने झांसी की विशेष अदालत को दोनों मामलों में छह सप्ताह के भीतर संबंधित आवेदनों पर नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
अदालत को यह भी तय करना होगा कि संबंधित मामलों में एक लाख रुपये या दो लाख रुपये की राहत राशि की कौन-सी दर लागू होती है।
इसके अलावा हाईकोर्ट ने अपने आदेश की प्रति प्रदेश के सभी संबंधित प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को भेजने का निर्देश दिया है, ताकि SC-ST Act के तहत मिलने वाली राहत राशि के वितरण और दावों की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
क्या है मामला?
SC-ST Act के तहत अत्याचार के पीड़ितों को निर्धारित नियमों के अनुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। हाईकोर्ट के इस आदेश से यह संदेश गया है कि राहत राशि का उद्देश्य वास्तविक पीड़ितों को समय पर सहायता उपलब्ध कराना है और इसके दुरुपयोग या अनियमित दावों की स्थिति में प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी जांच जरूरी है।
