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तिंदवारी नगर पंचायत में ‘अध्यक्ष प्रतिनिधि’ की भूमिका पर सवाल, डीएम से जांच की मांग
बिना टेंडर विद्युत सामग्री की खरीद और गौशाला के पशु आहार में अनियमितता के आरोप; शासनादेश के अनुपालन की भी उठी मांग
तिंदवारी/बांदा। नगर पंचायत तिंदवारी में अध्यक्ष के परिजन के कथित प्रशासनिक हस्तक्षेप और विकास कार्यों के लिए सामग्री खरीदने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे हैं। कस्बा निवासी बुद्धिविकास पटेल ने जिलाधिकारी बांदा को शिकायती पत्र सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायत में विद्युत सामग्री की कथित तौर पर बिना टेंडर खरीद, गौशाला के पशु आहार की खरीद में अनियमितता और सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
‘अध्यक्ष प्रतिनिधि’ की भूमिका पर उठाए सवाल
शिकायतकर्ता के अनुसार, नगर पंचायत अध्यक्ष सुधा साहू के पति रमेश चंद्र साहू कथित तौर पर स्वयं को ‘अध्यक्ष प्रतिनिधि’ बताकर कार्यालय के कामकाज और बैठकों में हस्तक्षेप करते हैं। आरोप है कि नगर पंचायत के विकास कार्यों के लिए तार, एलईडी बल्ब, सोडियम लाइट, तिरंगा लाइट सहित अन्य विद्युत सामग्री निजी दुकानों से बिना निर्धारित टेंडर प्रक्रिया के खरीदी जाती है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि सामग्री निजी आवास पर रखवाई जाती है और बाद में बिलों के माध्यम से नगर पंचायत से भुगतान कराया जाता है। शिकायतकर्ता ने खरीद प्रक्रिया, संबंधित बिलों, भुगतान और सामग्री के भंडारण से जुड़े अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है।
गौशाला के पशु आहार की खरीद पर भी सवाल
शिकायत में नगर पंचायत की गौशाला के लिए भूसा, चरी और अन्य पशु आहार की खरीद में भी कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने इस मद में किए गए व्यय और सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग की जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने संबंधित खरीद के बिल, भुगतान विवरण, स्टॉक रजिस्टर और उपलब्ध सामग्री का मिलान कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है, ताकि यह पता चल सके कि खरीद निर्धारित नियमों के अनुरूप हुई या नहीं।
शासनादेश के अनुपालन की जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने अपने पत्र के साथ नगर विकास विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के शासनादेश संख्या 3905/नौ-1-12-8ई/95, दिनांक 10 अक्टूबर 2012 की प्रति संलग्न करने की बात कही है। उनके अनुसार, शासनादेश में निर्वाचित अध्यक्षों और सभासदों के परिजनों द्वारा उनके नाम पर प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप से संबंधित प्रतिबंधात्मक प्रावधानों का उल्लेख है।
शिकायत में मांग की गई है कि संबंधित शासनादेश के प्रावधानों का परीक्षण कर नगर पंचायत कार्यालय में ‘अध्यक्ष प्रतिनिधि’ की कथित भूमिका और उसके औचित्य की जांच कराई जाए। शासनादेश के प्रावधानों की प्रयोज्यता और अनुपालन की स्थिति संबंधित अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अधिशासी अधिकारी को धमकी देने का भी आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कथित अनियमितताओं का विरोध करने पर नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी का स्थानांतरण कराने की धमकी दी जाती है। इसके अलावा, कुछ स्थानीय मीडिया कर्मियों के माध्यम से उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किए जाने का आरोप भी शिकायत में लगाया गया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
डीएम से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
बुद्धिविकास पटेल ने जिलाधिकारी से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, नगर पंचायत कार्यालय में कथित अनधिकृत हस्तक्षेप की पड़ताल करने और विद्युत सामग्री व गौशाला के पशु आहार की खरीद से संबंधित टेंडर, बिल, भुगतान तथा स्टॉक अभिलेखों का सत्यापन कराने की मांग की है।
उन्होंने कहा है कि यदि जांच में वित्तीय या प्रक्रियागत अनियमितताएं सामने आती हैं, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए और सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग पर रोक लगाई जाए।
खबर लिखे जाने तक इस मामले में नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी और अध्यक्ष पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया था। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि और जिम्मेदारी का निर्धारण प्रशासनिक जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही किया जा सकेगा।

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