सरकार में नौकरशाही और प्रचार तंत्र हावी, जनता की आवाज दबाई जा रही : राजेश दीक्षित
बाँदा। कांग्रेस नेता राजेश दीक्षित ने प्रदेश और केंद्र सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में नौकरशाही और प्रचार तंत्र पूरी तरह हावी हो चुका है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता, विपक्ष और निष्पक्ष मीडिया की बात सुनी जानी चाहिए, लेकिन वर्तमान समय में न तो आम जनता की सुनवाई हो रही है, न विपक्ष की आवाज को महत्व दिया जा रहा है और न ही निष्पक्ष मीडिया द्वारा उठाए गए मुद्दों पर प्रभावी कार्रवाई हो रही है।
राजेश दीक्षित ने कहा कि सरकार विकास और जनकल्याण के बड़े-बड़े दावे कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत इससे अलग दिखाई देती है। उनके अनुसार जिन योजनाओं का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया गया, उनमें से अधिकांश अपेक्षित परिणाम देने में विफल रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आम नागरिक महंगाई, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता से त्रस्त है।
उन्होंने कहा कि खाद्य तेल, रसोई गैस सिलेंडर, पेट्रोल, घरेलू उपयोग की वस्तुएं और दैनिक आवश्यकताओं का सामान पहले की तुलना में कई गुना महंगा हो गया है, जिससे आम और मध्यम वर्गीय परिवारों का घरेलू बजट पूरी तरह प्रभावित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेट्रोल में मिलावट को भी सरकार वैध ठहराने का प्रयास कर रही है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा कि वर्तमान शासनकाल में फर्जी मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं तथा बुलडोजर कार्रवाई का भय दिखाकर लोगों को डराया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में सबसे अधिक फर्जी एनकाउंटर हुए हैं।
राजेश दीक्षित ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह व्यवस्था अब आम जनता के लिए महत्वहीन होती जा रही है। उनका आरोप है कि शिकायतें दर्ज होने के बावजूद अधिकांश मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने कहा कि कई बार अधिकारी शिकायतकर्ताओं पर बुलडोजर कार्रवाई का भय दिखाकर दबाव बनाने का प्रयास करते हैं, लेकिन अब जनता वास्तविक स्थिति को समझ चुकी है।
उन्होंने शिकायतों की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिन अधिकारियों के विरुद्ध शिकायतें भेजी जाती हैं, कई बार उन्हीं अधिकारियों को जांच का जिम्मा सौंप दिया जाता है, जिससे निष्पक्ष जांच की उम्मीद समाप्त हो जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब आम नागरिकों के लिए जिला अधिकारी और पुलिस अधीक्षक जैसे वरिष्ठ अधिकारियों से सीधे मिलकर अपनी बात रखना भी कठिन हो गया है।
राजेश दीक्षित ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी निशाना साधते हुए कहा कि चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं और आम मरीजों को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लाखों विद्यालय बंद हो चुके हैं, जिससे गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई है।
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड आज भी रोजगार के गंभीर संकट से जूझ रहा है। युवाओं को स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रोजगार नहीं मिलने के कारण बड़े पैमाने पर पलायन करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में क्षेत्र के विकास के प्रति गंभीर है तो उसे उद्योग, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर प्राथमिकता के साथ काम करना चाहिए।
राजेश दीक्षित ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में निष्पक्ष मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में मीडिया भी खुलकर सवाल नहीं कर पा रही है। उनके अनुसार प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह हावी है और जनता विभिन्न समस्याओं से जूझ रही है।
उन्होंने सरकार से महंगाई और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण, शिकायतों की निष्पक्ष जांच, स्वास्थ्य एवं शिक्षा व्यवस्था में सुधार, बुंदेलखंड में रोजगार सृजन तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की मांग की।