प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने पत्रकार अंशू गुप्ता की शिकायत पर बांदा के एसपी पलाश बंसल सहित 4 पुलिस अधिकारियों को रिमाइंडर भेजा। जवाब न मिलने पर एकपक्षीय सुनवाई की चेतावनी।
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बांदा एसपी समेत 4 पुलिस अधिकारियों को प्रेस परिषद का रिमाइंडर, जवाब न देने पर एकपक्षीय सुनवाई
बांदा। पत्रकार अंशू गुप्ता के मामले में भारतीय प्रेस परिषद (Press Council of India) ने कड़ा रुख अपनाते हुए बांदा पुलिस के चार अधिकारियों को स्मरण पत्र (रिमाइंडर) जारी कर जवाब तलब किया है। परिषद ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, तो मामले की सुनवाई एकपक्षीय (ex-parte) तरीके से की जाएगी।
किन अधिकारियों से मांगा गया जवाब ?
प्रेस परिषद द्वारा जारी 13 जुलाई 2026 के स्मरण पत्र (केस संख्या 33/2025/बी) में निम्न अधिकारियों को जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं—
पुलिस अधीक्षक, बांदा – पलाश बंसल
पुलिस अधीक्षक, सीतापुर (पूर्व में बांदा) – अंकुर अग्रवाल
थाना प्रभारी – रामजीत गौर
उप निरीक्षक, थाना फतेहगंज – गिरिश चंद्र यादव
पहले नोटिस का नहीं मिला जवाब
प्रेस परिषद ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि 10 जून 2026 को इन सभी अधिकारियों को नोटिस जारी कर लिखित पक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया था, लेकिन तय समय सीमा के भीतर कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ।
इसी कारण अब परिषद ने दोबारा रिमाइंडर जारी करते हुए 2 सप्ताह के भीतर जवाब देने का अंतिम अवसर दिया है।
एकपक्षीय सुनवाई की चेतावनी
प्रेस परिषद ने स्पष्ट किया है कि यदि संबंधित अधिकारी निर्धारित समय में अपना पक्ष नहीं रखते हैं, तो यह मामला बिना उनके जवाब के ही जांच समिति के समक्ष प्रस्तुत कर दिया जाएगा, जिससे उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है।
क्या है पूरा मामला ?
यह पूरा प्रकरण पत्रकार अंशू गुप्ता, जिला संवाददाता (दैनिक भारत कनेक्ट) द्वारा बांदा पुलिस के खिलाफ की गई शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर प्रेस परिषद ने इस मामले को संज्ञान में लिया और अब यह जांच प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच चुका है।
बढ़ सकता है मामला
प्रेस परिषद की इस सख्ती से संकेत मिल रहे हैं कि मामला गंभीर माना जा रहा है। यदि पुलिस अधिकारियों द्वारा समय पर जवाब नहीं दिया गया, तो यह प्रकरण आगे चलकर पत्रकारों की सुरक्षा और अधिकारों से जुड़े बड़े मुद्दे के रूप में भी उभर सकता है।
यह मामला न केवल एक पत्रकार की शिकायत तक सीमित है, बल्कि यह प्रेस की स्वतंत्रता और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित अधिकारी समय सीमा के भीतर अपना पक्ष रखते हैं या नहीं।
Anil Tiwari is a Senior Journalist with extensive experience in print, digital, and television journalism. He has covered a wide range of subjects, including governance, public policy, politics, rural development, environment, illegal mining, law and order, and social issues. His work is driven by factual reporting, investigative journalism, and in-depth analysis, with a strong commitment to public interest and ethical journalism. Over the years, he has consistently highlighted grassroots issues, giving voice to underserved communities through credible and impactful reporting.
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