शपथ पत्र देकर शिकायतकर्ता ने बताया एससी-एसटी मामला फर्जी, कहा- रंजिशन दर्ज कराया गया मुकदमा

शिकायतकर्ता बोला- शिवनारायण गुप्ता समेत अन्य लोगों को फिजूल में फंसाया गया, घटना ही नहीं हुई तो मुकदमा कैसे दर्ज हुआ ?
नरैनी/बांदा। नरैनी क्षेत्र में दर्ज एक एससी-एसटी मामले को लेकर नया मोड़ सामने आया है। मामले में शिकायतकर्ता द्वारा पुलिस अधीक्षक को शपथ पत्र देकर मुकदमे को फर्जी बताया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि आपसी रंजिश के चलते मामले को दर्ज कराया गया, जबकि उसके साथ ऐसी कोई घटना घटित ही नहीं हुई।
शिकायतकर्ता के मुताबिक वह गुलमोहर, नरैनी क्षेत्र में गार्ड की नौकरी करता है। उसने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर अपना पक्ष रखते हुए शपथ पत्र दिया। मीडिया से बातचीत में भी उसने मामले को फर्जी बताते हुए कहा कि उसके साथ ऐसी कोई घटना नहीं हुई और वह इस मामले में किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं चाहता।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि शिवनारायण गुप्ता समेत अन्य लोगों को फिजूल में इस मामले में फंसाया गया है। उसका कहना है कि जब कथित घटना हुई ही नहीं तो मुकदमा दर्ज किए जाने का आधार क्या था।
शिकायतकर्ता ने उठाए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
मामले में शिकायतकर्ता के बयान के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि उसके अनुसार घटना हुई ही नहीं, तो मुकदमा किस आधार पर दर्ज किया गया और जांच के नाम पर संबंधित लोगों को प्रताड़ित किए जाने की स्थिति कैसे बनी।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। शिकायतकर्ता के शपथ पत्र और उसके बयान के बाद मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया, उपलब्ध साक्ष्यों तथा जांच अधिकारी द्वारा अब तक की गई कार्रवाई की भी जांच किए जाने की मांग उठ रही है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि मुकदमा दर्ज करने का आधार क्या था और विवेचना नियमानुसार की गई या नहीं।
सीओ बोले- जानकारी मिलने पर होगी जांच
इस संबंध में सीओ नरैनी प्रवीण यादव ने बताया कि उन्हें अभी इस विषय में कोई जानकारी नहीं है। जैसे ही प्रकरण की जानकारी प्राप्त होगी, जांच कराई जाएगी और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अब शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए शपथ पत्र और लगाए गए आरोपों के बाद पुलिस की जांच पर सबकी निगाहें हैं। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी कि दर्ज मुकदमे में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और शिकायतकर्ता द्वारा अब लगाए जा रहे आरोप कितने सही हैं ।