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महोबा: उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के हरपालपुर-महोबकांत क्षेत्र में पहली बार उच्च गुणवत्ता वाले ज़िरकोनियम खनिज भंडार की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद प्रदेश में इस रणनीतिक धातु के खनन का रास्ता साफ हो गया है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की प्रारंभिक खोज के बाद केंद्रीय खान मंत्रालय की जांच में यहां समृद्ध भंडार मिलने की पुष्टि की गई है।
खनन कार्य के लिए पश्चिम बंगाल की माहेश्वरी माइनिंग कंपनी को लाइसेंस प्रदान किया गया है। राज्य सरकार ने हाल ही में प्रमुख खनिजों के 13 ब्लॉकों की सफल नीलामी पूरी की है, जिनमें 10 ब्लॉकों को कॉम्पोजिट लाइसेंस तथा 3 ब्लॉकों को माइनिंग लीज के लिए स्वीकृति दी गई है। महोबा का ज़िरकोनियम ब्लॉक भी इन्हीं में शामिल है और यहां जल्द ही खनन कार्य शुरू होने की संभावना है।
ज़िरकोनियम क्या है?
ज़िरकोनियम एक चमकदार चांदी-धूसर रंग की धातु है, जो अत्यधिक तापमान और संक्षारण (Corrosion) का सामना करने की क्षमता रखती है। इसका गलनांक लगभग 1855 डिग्री सेल्सियस है। यही कारण है कि इसे परमाणु, रक्षा और उच्च तकनीकी उद्योगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक धातु माना जाता है।
ज़िरकोनियम का उपयोग किन क्षेत्रों में होता है?
- परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में
- एयरोस्पेस एवं रक्षा उद्योग
- रासायनिक उद्योग
- आभूषण एवं रत्न उद्योग
- दंत चिकित्सा उपकरणों के निर्माण में
- आधुनिक औद्योगिक एवं उच्च तकनीकी क्षेत्रों में
उत्तर प्रदेश के लिए क्यों है बड़ी उपलब्धि?
अब तक भारत में ज़िरकोनियम के प्रमुख भंडार केवल ओडिशा, तमिलनाडु और केरल में उपलब्ध थे। महोबा में खनन शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश देश का चौथा ज़िरकोनियम उत्पादक राज्य बन जाएगा। इससे प्रदेश में खनन उद्योग, औद्योगिक निवेश, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना बुंदेलखंड क्षेत्र के आर्थिक विकास के साथ-साथ देश की रणनीतिक खनिज आवश्यकताओं को भी मजबूत करेगी। आने वाले समय में इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार, आधारभूत ढांचे के विकास और औद्योगिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है.

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