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माँ 64 योगिनी मंदिर जरोहरा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, अष्टमी पर लगता है विशाल मेला
नवरात्र में प्रतिदिन दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं भक्त, अष्टमी पर दूरदराज के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु लगाते हैं हाजिरी

बांदा । माँ 64 योगिनी माता मंदिर जरोहरा में नवरात्र के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। नवरात्र के दिनों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर देवी मां के दर्शन-पूजन करते हैं, लेकिन अष्टमी के दिन यहां विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिलता है। इस अवसर पर मंदिर परिसर में विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें क्षेत्र के साथ-साथ जनपद और दूरदराज के इलाकों से हजारों श्रद्धालु पहुंचकर मां के दरबार में माथा टेकते हैं।
मंदिर में अष्टमी के दिन विशेष पूजा-अर्चना का विधान होने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या में काफी वृद्धि हो जाती है। भक्त परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना लेकर मां के दरबार में पहुंचते हैं। वहीं, जिन श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, वे मां के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करने और पूजा-अर्चना करने के लिए दोबारा मंदिर पहुंचते हैं। नवरात्र के दौरान मंदिर का वातावरण भक्तिमय बना रहता है तथा श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार जारी रहती है।
अष्टमी पर विशेष पूजा का है धार्मिक महत्व
माँ 64 योगिनी माता मंदिर के प्रति क्षेत्रीय लोगों की गहरी आस्था है। मान्यता है कि सच्चे मन से मां के दरबार में प्रार्थना करने वाले भक्तों को आध्यात्मिक संबल और मन की शांति प्राप्त होती है। इसी आस्था के चलते नवरात्र में मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। अष्टमी के दिन विशेष पूजा-अर्चना के चलते मंदिर परिसर में मेले जैसा माहौल रहता है। दूरदराज से आने वाले श्रद्धालु दर्शन-पूजन के साथ धार्मिक परंपराओं में भाग लेते हैं।
मनोकामना पूरी होने पर दोबारा आते हैं श्रद्धालु : देवीदत्त तिवारी (अध्यक्ष )
मंदिर समिति के अध्यक्ष देवीदत्त तिवारी ने बताया कि माँ 64 योगिनी माता मंदिर में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है, लेकिन अष्टमी का विशेष महत्व है। इस दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और बड़ी संख्या में भक्त मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि जिन श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, वे मां के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिए दोबारा मंदिर आते हैं। मां के प्रति भक्तों की अटूट आस्था ही मंदिर की विशेष पहचान है। श्रद्धालु विश्वास के साथ मां के दरबार में पहुंचते हैं और अपने कष्टों से मुक्ति तथा परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं।
ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों के सहयोग से होता है बड़ा आयोजन
मंदिर में धार्मिक आयोजनों और मेले को व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने में मंदिर समिति के सदस्यों के साथ ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। समिति में अध्यक्ष देवीदत्त तिवारी के साथ ब्रजेश तिवारी, पं. राकेश पाठक शास्त्री, अनिल तिवारी, अखिलेश कुशवाहा, चुन्नू तिवारी,विनय तिवारी, छोटकू यादव, अजय तिवारी, राधे,पवन विश्वकर्मा, कल्लू यादव, शिवबरन यादव सहित अनेक लोग शामिल हैं। इनके साथ सैकड़ों ग्रामीण और क्षेत्रवासी हर वर्ष आयोजन में सहयोग करते हैं।
समिति के सदस्यों और स्थानीय लोगों के सामूहिक प्रयास से नवरात्र के दौरान मंदिर में धार्मिक गतिविधियां संचालित होती हैं। अष्टमी के अवसर पर श्रद्धालुओं की अधिक संख्या को देखते हुए आयोजन को सफल बनाने में ग्रामीणों का सहयोग विशेष महत्व रखता है।
माँ 64 योगिनी माता मंदिर जरोहरा न केवल श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है, बल्कि नवरात्र के दौरान क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को भी जीवंत बनाए रखता है। अष्टमी पर लगने वाला विशाल मेला क्षेत्रीय एकजुटता, लोकआस्था और मां के प्रति भक्तों की अटूट श्रद्धा का प्रतीक बन गया है।


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