उद्घाटन के 13 दिन बाद ही क्षतिग्रस्त हुआ ₹4,200 करोड़ का लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल
लखनऊ। देश की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल ₹4,200 करोड़ की लागत से निर्मित 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर ग्रीनफील्ड एलिवेटेड एक्सप्रेसवे (NE-6) का एक हिस्सा उद्घाटन के महज 13 दिन बाद ही भारी बारिश के बाद क्षतिग्रस्त हो गया। उन्नाव जिले के अचलगंज और कोरारी क्षेत्र के पास सड़क की ऊपरी सतह प्रभावित होने और सड़क के हिस्से में धंसाव जैसी स्थिति सामने आने के बाद निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। उद्घाटन के दौरान दावा किया गया था कि इस परियोजना से लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा का समय लगभग तीन घंटे से घटकर मात्र 40 मिनट रह जाएगा।
बारिश के बाद सामने आई क्षति
26 जुलाई को हुई तेज बारिश के बाद एक्सप्रेसवे के उन्नाव स्थित हिस्से में सड़क की ऊपरी परत उखड़ने और सतह क्षतिग्रस्त होने की तस्वीरें एवं वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। घटना के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे।
विपक्ष ने उठाए भ्रष्टाचार और गुणवत्ता के मुद्दे
घटना के बाद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए निर्माण गुणवत्ता, परियोजना की निगरानी और संभावित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच की मांग की। विपक्ष का कहना है कि हजारों करोड़ रुपये की लागत से बनी परियोजना का कुछ ही दिनों में क्षतिग्रस्त होना गंभीर चिंता का विषय है।
NHAI की सफाई
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सड़क पूरी तरह धंसने के दावों का खंडन करते हुए कहा कि लगभग 40 मीटर हिस्से में केवल सड़क की ऊपरी वेयरिंग कोट (wearing coat) प्रभावित हुई थी। प्राधिकरण के अनुसार यह संरचनात्मक धंसाव नहीं था और मरम्मत कार्य कुछ ही घंटों में पूरा कर लिया गया, जिसके बाद यातायात सामान्य रूप से जारी रहा।
जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई
घटना के बाद NHAI ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की है। प्रारंभिक कार्रवाई के तहत निर्माण से जुड़े तीन अधिकारियों पर दो वर्ष का प्रतिबंध लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। साथ ही परियोजना की गुणवत्ता और जवाबदेही की समीक्षा भी की जा रही है।
जनता के बीच बढ़ी चिंता
करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस हाई-प्रोफाइल एक्सप्रेसवे में उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सामने आई तकनीकी खामियों ने सार्वजनिक परियोजनाओं की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर बहस तेज कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी नई सड़क में शुरुआती दौर में ही ऐसी समस्याएं सामने आती हैं, तो विस्तृत तकनीकी जांच कर वास्तविक कारणों का पता लगाना आवश्यक है ताकि भविष्य में यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।