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Kalinjar Fort बना National Geo Heritage Site, GSI का बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश के बांदा स्थित कालिंजर किला क्षेत्र को GSI ने राष्ट्रीय भू-धरोहर स्थल घोषित किया। जानें इसका ऐतिहासिक, भूवैज्ञानिक महत्व और पर्यटन पर प्रभाव।

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कालिंजर किला बना राष्ट्रीय भू-धरोहर स्थल

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में स्थित ऐतिहासिक कालिंजर किला (Kalinjar Fort) अब राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान हासिल कर चुका है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने कालिंजर किले के आसपास के पहाड़ी क्षेत्र को National Geo-Heritage Site घोषित किया है। यह निर्णय इस क्षेत्र के ऐतिहासिक और भूवैज्ञानिक महत्व को देखते हुए लिया गया है।

क्या है Geo-Heritage Site का महत्व?

Geo-Heritage Site उन स्थानों को कहा जाता है जहां दुर्लभ और महत्वपूर्ण भूवैज्ञानिक संरचनाएं पाई जाती हैं। कालिंजर क्षेत्र को यह दर्जा इसकी अनोखी संरचना Eparchaean Unconformity के कारण मिला है।

यहां लगभग:

2.5 अरब वर्ष पुराने ग्रेनाइट

1.2 अरब वर्ष पुराने बलुआ पत्थर

एक साथ पाए जाते हैं, जो पृथ्वी के विकास के लंबे अंतराल को दर्शाते हैं।

 

कालिंजर किले का ऐतिहासिक महत्व

कालिंजर किला भारत के सबसे प्राचीन और शक्तिशाली किलों में गिना जाता है। यह किला विंध्य पर्वत श्रृंखला पर स्थित है और इतिहास में कई शासकों के अधीन रहा है, जिनमें प्रमुख हैं:

चंदेल वंश

मुगल साम्राज्य

मराठा शासन

ऐतिहासिक रूप से कालिंजर किला एक अजेय किला माना जाता रहा है। मान्यता है कि कोई भी इस किले को पूरी तरह जीतकर स्थायी रूप से अपने कब्जे में नहीं रख पाया।

किले में स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और यहां हर साल हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

पहले भी उठती रही थी मांग

स्थानीय स्तर पर कालिंजर किले और उसके भूवैज्ञानिक महत्व को लेकर लंबे समय से आवाज उठती रही है। इस संबंध में पहले भी कई बार संबंधित अधिकारियों को फोन किए गए थे और प्रमुखता से खबरें भी प्रकाशित की गई थीं। लगातार प्रयासों और जागरूकता के बाद अब जाकर इस ऐतिहासिक स्थल को राष्ट्रीय भू-धरोहर का दर्जा मिला है।

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

GSI के इस फैसले के बाद कालिंजर क्षेत्र को पर्यटन के लिहाज से विकसित करने की योजना है। इसे खजुराहो-चित्रकूट-कालिंजर पर्यटन सर्किट से जोड़ने की संभावना है, जिससे बुंदेलखंड क्षेत्र में पर्यटन को नई गति मिलेगी।

इससे:

स्थानीय रोजगार बढ़ेगा

पर्यटन व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा

क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी

संरक्षण और जागरूकता पर जोर

GSI द्वारा इस स्थल पर सूचना पट्ट (Information Boards) लगाए गए हैं, जिससे लोगों को इसकी वैज्ञानिक और ऐतिहासिक जानकारी मिल सके।

सरकार और संबंधित विभाग अब इस क्षेत्र के संरक्षण और विकास पर विशेष ध्यान दे रहे हैं ताकि यह धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रह सके।

कालिंजर किला का National Geo-Heritage Site के रूप में घोषित होना उत्तर प्रदेश और पूरे देश के लिए गर्व की बात है। यह न केवल भारत की समृद्ध भूवैज्ञानिक विरासत को दर्शाता है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय विकास के नए अवसर भी खोलता है।

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ANIL TIWARI

Anil Tiwari

Anil Tiwari is a Senior Journalist with extensive experience in print, digital, and television journalism. He has covered a wide range of subjects, including governance, public policy, politics, rural development, environment, illegal mining, law and order, and social issues. His work is driven by factual reporting, investigative journalism, and in-depth analysis, with a strong commitment to public interest and ethical journalism. Over the years, he has consistently highlighted grassroots issues, giving voice to underserved communities through credible and impactful reporting.

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