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गैंगस्टर आरोपी के संरक्षण में अवैध कटान का आरोप
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सड़क किनारे लकड़ियों के ढेर से बढ़ा दुर्घटना का खतरा
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वन विभाग व पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
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लगातार पेड़ कटान से बढ़ रही गर्मी, बुंदेलखंड पर असर
बांदा (जसपुरा)। जनपद के जसपुरा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटाई का गंभीर मामला सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि एक गैंगस्टर आरोपी के संरक्षण में यह अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है, जिसमें पेड़ों की कटाई कर लकड़ी को ट्रकों के जरिए क्षेत्र से बाहर भेजा जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, कटे हुए पेड़ों की लकड़ियां सड़क किनारे बड़ी मात्रा में पड़ी रहती हैं, जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है बल्कि राहगीरों के लिए भी हादसों का खतरा बढ़ गया है। कई बार वाहन चालकों को इन लकड़ियों के कारण असुविधा और दुर्घटना की आशंका का सामना करना पड़ता है।
पहले भी हो चुकी कार्रवाई, फिर भी जारी अवैध कारोबार
स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में हमीरपुर पुलिस ने संबंधित गैंगस्टर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसका “कांटा” (लकड़ी तौल केंद्र) भी सीज किया था। इसके बावजूद अवैध लकड़ी का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे प्रशासनिक कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं।
पर्यावरण पर पड़ रहा गंभीर असर
ग्रामीणों ने बताया कि लगातार हरे-भरे पेड़ों की कटाई से क्षेत्र में तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। बुंदेलखंड पहले ही भीषण गर्मी के लिए जाना जाता है और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई इस समस्या को और गंभीर बना रही है।
वन विभाग और पुलिस पर लापरवाही के आरोप
क्षेत्रवासियों ने आरोप लगाया है कि वन विभाग और स्थानीय पुलिस की मिलीभगत या लापरवाही के चलते यह अवैध कारोबार खुलेआम चल रहा है। कई बार शिकायत के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, अवैध पेड़ कटान पर तत्काल रोक लगाई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही, सड़क किनारे पड़ी लकड़ियों को जल्द हटवाकर संभावित दुर्घटनाओं को रोका जाए।
जसपुरा में अवैध पेड़ कटान का यह मामला न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि पर्यावरण और आम जनजीवन के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका है। यदि समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है।

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