डायग्नोस्टिक सेंटर को बदनाम करने के लिए फर्जी दस्तावेजों से शिकायत का आरोप
मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराकर दस्तावेज की फोरेंसिक जांच, रंगदारी के आरोपों की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज़
बांदा। एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर को कथित रूप से बदनाम करने और दबाव बनाकर धन वसूली के प्रयास के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार कर शिकायत किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सेंटर संचालक ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच, कथित दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच तथा दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
पीड़ित सेंटर संचालक का आरोप है कि उसके संस्थान के संबंध में तैयार की गई एक सीटी रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों को आधार बनाकर शिकायत की गई। उनका दावा है कि शिकायत में इस्तेमाल किए गए दस्तावेज प्रथम दृष्टया संदिग्ध हैं और उनकी सत्यता की जांच तकनीकी एवं फोरेंसिक माध्यम से कराई जानी चाहिए।
विभागीय बाबू की सह पर रैकेट चलाने का आरोप
सेंटर संचालक ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि कथित फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से शिकायत कराने का एक रैकेट विभागीय NHM में कार्यरत अटैच बाबू हेमंत यादव की कथित सह पर संचालित किया जा रहा है। आरोप है कि शिकायतकर्ता और उसके सहयोगियों द्वारा तैयार कराए गए दस्तावेजों का इस्तेमाल डायग्नोस्टिक सेंटर पर दबाव बनाने तथा उसकी सामाजिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए किया गया।
पीड़ित ने संविदा कर्मी हेमंत यादव और शिकायतकर्ता प्रमोद यादव आजाद समेत अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पर भी सवाल
पीड़ित पक्ष ने विभाग की ओर से जारी नोटिस की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उसका आरोप है कि नोटिस देते समय निर्धारित नियमों एवं प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। संचालक ने नोटिस तैयार करने, जारी करने और उसके आधार में शामिल तथ्यों की भी विभागीय जांच कराने की मांग की है।
उसका कहना है कि यदि दस्तावेजों की जांच में किसी प्रकार की कूटरचना सामने आती है और किसी कर्मचारी अथवा अन्य व्यक्ति की भूमिका प्रमाणित होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जानी चाहिए।
दो पत्रकारों की भूमिका पर भी लगाए आरोप
सेंटर संचालक ने पूरे प्रकरण में दो पत्रकारों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि शिकायत और उससे जुड़े कथित दस्तावेजों को प्रचारित कर संस्थान की प्रतिष्ठा प्रभावित करने का प्रयास किया गया। पीड़ित ने पूरे मामले की जांच कर यह पता लगाने की मांग की है कि शिकायत तैयार करने से लेकर उसे प्रचारित करने तक किन लोगों की भूमिका रही।
फोरेंसिक जांच और तत्काल कार्रवाई की मांग
पीड़ित ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज शिकायत में कथित सीटी रिपोर्ट, संबंधित दस्तावेजों और शिकायत में लगाए गए आरोपों की तकनीकी एवं फोरेंसिक जांच कराने की मांग की है। साथ ही कथित आर्थिक दबाव और रंगदारी वसूली के आरोपों की भी जांच कराए जाने की मांग की गई है।
संचालक का कहना है कि यदि जांच में दस्तावेज कूटरचित पाए जाते हैं या किसी व्यक्ति की आपराधिक साजिश में भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही दोषी पाए जाने वाले लोगों को जेल भेजने की मांग भी की गई है।
मानहानि का मुकदमा करने की बात
डायग्नोस्टिक सेंटर संचालक ने कहा कि झूठे और आधारहीन आरोपों के कारण उसके संस्थान की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया है। इस संबंध में वह न्यायालय के माध्यम से मानहानि का मुकदमा दाखिल करने की तैयारी कर रहा है।
पीड़ित ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच किसी निष्पक्ष अधिकारी या सक्षम जांच एजेंसी से कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शिकायत में लगाए गए आरोप तथ्यात्मक हैं या किसी व्यक्ति अथवा संस्थान को दबाव में लेने और बदनाम करने के उद्देश्य से तैयार किए गए।
नोट: इस समाचार में उल्लिखित आरोप पीड़ित डायग्नोस्टिक सेंटर संचालक द्वारा की गई शिकायत एवं उसके दावों पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि समाचार लिखे जाने तक नहीं हुई है। संबंधित शिकायतकर्ता, विभागीय कर्मचारी एवं अन्य आरोपित पक्षों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।