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चित्रकूट में मंदाकिनी का रौद्र रूप, खतरे के निशान से करीब 5 मीटर ऊपर जलस्तर
रामघाट समेत कई इलाके जलमग्न, घरों-दुकानों में घुसा पानी; सतना-चित्रकूट मार्ग बाधित, डीएम पुलकित गर्ग ने संभाला मोर्चा
चित्रकूट। लगातार बारिश और मध्य प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों से आ रहे पानी के चलते चित्रकूट में मंदाकिनी नदी एक बार फिर उफान पर है। ताजा स्थिति के अनुसार नदी का जलस्तर खतरे के निशान 126.50 मीटर से करीब 4.5 मीटर ऊपर पहुंच गया है। जलस्तर बढ़ने से रामघाट समेत नदी किनारे के कई निचले इलाकों में पानी भर गया है। कई दुकानों, मकानों और अन्य प्रतिष्ठानों में पानी पहुंचने से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है।
चारों तरफ पानी ही पानी नजर आने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई स्थानों पर सड़क और संपर्क मार्ग जलमग्न होने के कारण आवागमन प्रभावित हुआ है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है।
रामघाट समेत कई इलाके जलमग्न
मंदाकिनी के बढ़ते जलस्तर से रामघाट और आसपास के क्षेत्रों में पानी भर गया है। घाट किनारे स्थित दुकानों और मकानों में पानी पहुंचने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रामघाट से कामतानाथ, आरोग्यधाम और जानकीकुंड की ओर जाने वाले मार्गों पर भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है। कुछ स्थानों पर लोगों को आवागमन के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है।
सतना-चित्रकूट मार्ग पर आवागमन बाधित
बाढ़ का असर सड़क संपर्क पर भी पड़ा है। मानिकपुर-सतना मुख्य मार्ग पर टिकरिया के पास रपटा तेज बहाव के कारण क्षतिग्रस्त होने से आवागमन बाधित हुआ है। इससे सतना की ओर आने-जाने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
वहीं कर्वी-बांदा मार्ग पर पहले क्षतिग्रस्त हुए पुल के अप्रोच की मरम्मत के बाद आवागमन बहाल किए जाने की जानकारी है। ऐसे में अलग-अलग मार्गों पर जलस्तर और सड़क की स्थिति के अनुसार आवागमन प्रभावित हो रहा है।
प्रयागराज- कर्वी समेत कई संपर्क मार्गों पर संकट
बाढ़ और जलभराव का असर आसपास के क्षेत्रों के संपर्क मार्गों पर भी दिखाई दे रहा है। प्रयागराज-करवी क्षेत्र में नदी और नालों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण कई स्थानों पर आवागमन प्रभावित हुआ है।
चित्रकूट के राजापुर क्षेत्र में भी बाढ़ का पानी कई संपर्क मार्गों तक पहुंच चुका है। निचले इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
घरों में घुसा पानी, आम जनजीवन अस्त-व्यस्त
लगातार बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर से कई इलाकों में लोगों के घरों में पानी घुस गया है। जलभराव के कारण दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
कई मोहल्लों और क्षेत्रों की गलियां पानी में डूब गई हैं। लोगों को घरों से निकलने, जरूरी सामान लाने और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।
तीन दिन पहले भी भारी तबाही
गौरतलब है कि करीब तीन दिन पहले हुई भारी बारिश और मंदाकिनी के अचानक बढ़े जलस्तर ने चित्रकूट में भारी तबाही मचाई थी। नदी का जलस्तर रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंचने से रामघाट समेत कई इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया था।
इस दौरान एक संपर्क पुल भी टूट गया था, जिससे कई क्षेत्रों का आवागमन प्रभावित हुआ। हालात की गंभीरता को देखते हुए राहत एवं बचाव अभियान बड़े स्तर पर चलाया गया था।
सेना और एसडीआरएफ ने हेलिकॉप्टर से चलाया था राहत अभियान
पिछली बाढ़ के दौरान प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए सेना, एसडीआरएफ और अन्य बचाव दलों को लगाया गया था। जरूरत वाले क्षेत्रों में हेलिकॉप्टर की मदद से भी राहत-बचाव अभियान चलाया गया था।
प्रशासन ने प्रभावित लोगों तक भोजन, पानी और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाने के लिए राहत व्यवस्था सक्रिय की थी।
डीएम पुलकित गर्ग ने संभाला मोर्चा
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने स्वयं मोर्चा संभाल लिया है। प्रशासनिक अधिकारी लगातार संवेदनशील क्षेत्रों की स्थिति पर नजर रख रहे हैं। राहत और बचाव दलों को अलर्ट रखा गया है तथा आवश्यकता के अनुसार प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और जलस्तर बढ़ने की स्थिति में तत्काल सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की सलाह दी जा रही है।
समाजसेवियों और आम लोगों से सहयोग की अपील
बाढ़ की स्थिति में प्रशासन के साथ समाजसेवियों, स्वयंसेवी संगठनों और आम नागरिकों का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है। समाजसेवियों और सक्षम लोगों से अपील है कि वे जरूरतमंद परिवारों तक भोजन, पेयजल, दवाइयां और आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाने में प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर सहयोग करें।
आम लोगों से भी अपील है कि वे नदी, नालों और तेज बहाव वाले पानी के पास न जाएं। जलमग्न रास्तों पर अनावश्यक आवागमन से बचें और प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
फिलहाल चित्रकूट में मंदाकिनी के बढ़ते जलस्तर के बीच बाढ़ का खतरा बना हुआ है। प्रशासन की निगरानी और राहत-बचाव व्यवस्था लगातार जारी है। ऐसे में लोगों की सतर्कता, प्रशासन का सहयोग और समाजसेवियों की सक्रिय भूमिका बेहद जरूरी है।

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