27 जुलाई से चित्रकूट में निकलेगी बुंदेलखंड अलग राज्य की गांव-गांव, पांव-पांव पदयात्रा
बछेउरा सदन, बांदा में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आंदोलन की रूपरेखा घोषित, राजा बुंदेला बोले- केंद्र सरकार में अलग राज्य पर चल रही चर्चा
बांदा। बुंदेलखंड को पृथक राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को नई गति देने के उद्देश्य से 27 जुलाई से 2 अगस्त तक चित्रकूट जनपद में "गांव-गांव, पांव-पांव पदयात्रा" निकाली जाएगी। इसकी जानकारी बछेउरा सदन, आवास विकास कॉलोनी, बांदा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी गई। आंदोलन के पदाधिकारियों ने कहा कि दशकों से केंद्र सरकार तथा उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश की राज्य सरकारों की उपेक्षा का शिकार रहे बुंदेलखंड को उसका विकास और अधिकार दिलाने के लिए यह जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए बुंदेलखंड पृथक राज्य निर्माण यात्रा एवं आंदोलन के नेतृत्वकर्ता राजा बुंदेला ने कहा कि अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग अब जन आंदोलन का स्वरूप ले चुकी है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार के स्तर पर पृथक बुंदेलखंड राज्य के गठन को लेकर चर्चा चल रही है और निकट भविष्य में इस दिशा में सकारात्मक निर्णय की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड प्राकृतिक संसाधनों, खनिज संपदा और ऐतिहासिक विरासत से समृद्ध क्षेत्र होने के बावजूद विकास की मुख्यधारा से लगातार दूर रहा है। यहां के लाखों युवा रोजगार की तलाश में दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम सहित देश के विभिन्न शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हुए हैं। दिल्ली सहित देश की विभिन्न कॉलोनियों में रहने वाले लाखों बुंदेलखंडवासी इस आंदोलन से जुड़ चुके हैं और पृथक राज्य की मांग को समर्थन दे रहे हैं।
राजा बुंदेला ने कहा कि क्षेत्र की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि केंद्र सरकार का कोई बड़ा राष्ट्रीय संस्थान जैसे आईआईटी (IIT), आईआईएम (IIM) एम्स (AIIMS), पीजीआई (PGI) केंद्रीय विश्वविद्यालय अथवा अन्य प्रमुख केंद्रीय उपक्रम बुंदेलखंड में स्थापित नहीं किया गया। उद्योगों, सिंचाई, स्वास्थ्य, उच्च शिक्षा, रोजगार और आधारभूत ढांचे के विकास में भी क्षेत्र की लगातार उपेक्षा की गई है। उन्होंने कहा कि पृथक राज्य बनने पर स्थानीय संसाधनों का उपयोग क्षेत्र के विकास और युवाओं के भविष्य के लिए किया जा सकेगा।
बुंदेली सेना के प्रभारी डॉ. आश्रय सिंह ने कहा कि पदयात्रा का उद्देश्य गांव-गांव जाकर लोगों को बुंदेलखंड की समस्याओं तथा पृथक राज्य की आवश्यकता के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि जनता का समर्थन लगातार बढ़ रहा है और यह आंदोलन अब जन-जन की आवाज बन चुका है।
प्रताप सिंह बुन्देला (झांसी) ने कहा कि बुंदेलखंड की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक पहचान अलग है। क्षेत्र की दशकों से चली आ रही उपेक्षा को समाप्त करने के लिए पृथक राज्य का गठन आवश्यक है।
यात्रा प्रमुख राकेश बाजपेई (बांदा) ने बताया कि 27 जुलाई से 2 अगस्त तक चलने वाली पदयात्रा चित्रकूट जनपद के विभिन्न गांवों से होकर गुजरेगी। यात्रा के दौरान जनसभाएं, चौपाल, संवाद कार्यक्रम एवं जनसंपर्क अभियान आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोगों को इस जन आंदोलन से जोड़ा जा सके।
जेडीयू नेत्री शालिनी सिंह पटेल ने कहा कि जिस प्रकार महारानी लक्ष्मीबाई ने अपने स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया था, उसी प्रकार आज बुंदेलखंड के विकास और सम्मान के लिए महिलाओं सहित प्रत्येक नागरिक को आगे आकर अपनी भूमिका निभानी होगी।

समाजसेवी एवं सह संयोजक जयराम सिंह "बछेउरा" ने कहा कि सरकारें वर्षों से बुंदेलखंड से करोड़ों रुपये का कर (टैक्स) प्राप्त करती रही हैं, लेकिन बदले में क्षेत्र को अपेक्षित विकास नहीं मिला। सरकारी योजनाओं, संसाधनों और निवेश के वितरण में लगातार उपेक्षा के कारण आज भी बुंदेलखंड मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।
यात्रा प्रबंधक नीरज निगम (बांदा) ने बताया कि पदयात्रा की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यात्रा को सफल बनाने के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया गया है तथा बड़ी संख्या में सामाजिक संगठनों, युवाओं, महिलाओं और आम नागरिकों के जुड़ने की संभावना है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में वक्ताओं ने कहा कि यह पदयात्रा केवल पृथक राज्य की मांग तक सीमित नहीं होगी, बल्कि पलायन, बेरोजगारी, कृषि संकट, जल संकट, सरकारी उपेक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, औद्योगिक विकास और क्षेत्रीय असंतुलन जैसे मुद्दों को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेगी। उन्होंने बुंदेलखंडवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पदयात्रा में शामिल होकर इस जन आंदोलन को मजबूत बनाने का आह्वान किया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रमुख रूप से राजा बुंदेला (नेतृत्वकर्ता, बुंदेलखंड पृथक राज्य निर्माण यात्रा एवं आंदोलन), डॉ. आश्रय सिंह (प्रभारी, बुंदेली सेना), प्रताप सिंह बुन्देला (झांसी), राकेश बाजपेई (यात्रा प्रमुख, बांदा), शालिनी सिंह पटेल (जेडीयू नेत्री), जयराम सिंह "बछेउरा" (समाजसेवी एवं सह संयोजक) तथा नीरज निगम (यात्रा प्रबंधक, बांदा) उपस्थित रहे।