बांदा जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में सांसद कृष्णा पटेल की बेटी श्वेता पटेल पर कथित फर्जी नियुक्ति और बिना ड्यूटी वेतन लेने के आरोप लगे हैं। जेडीयू नेता शालिनी सिंह पटेल ने शिकायती पत्र देकर सरकार से हस्तक्षेप, न्यायिक जांच और CDR जांच की मांग की है।
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बांदा ट्रामा सेंटर में कथित फर्जी नियुक्ति का मामला: श्वेता पटेल पर आरोप, जेडीयू ने मांगी न्यायिक जांच
बांदा। उत्तर प्रदेश के बांदा जिला अस्पताल स्थित ट्रामा सेंटर में कथित फर्जी नियुक्ति और बिना ड्यूटी वेतन आहरित किए जाने के आरोपों ने स्वास्थ्य विभाग में हलचल मचा दी है। समाजवादी पार्टी की बांदा-चित्रकूट सांसद कृष्णा पटेल की बेटी श्वेता पटेल को लेकर लगाए गए आरोपों के बाद मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्वेता पटेल पिछले लगभग दो वर्षों से जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में कार्यरत बताई जा रही हैं। आरोप है कि सांसद बनने के बाद से उन्होंने नियमित रूप से ड्यूटी नहीं की, जबकि उनके नाम पर वेतन का भुगतान होता रहा।
आरोपों में यह भी कहा गया है कि उनकी जगह संजय नामक एक युवक कथित रूप से ₹4,000 से ₹5,000 प्रतिमाह के भुगतान पर ड्यूटी करता रहा। हालांकि, इन दावों की अभी तक किसी सक्षम सरकारी एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इस मामले को लेकर जनता दल (यूनाइटेड) की प्रदेश उपाध्यक्ष एवं बुंदेलखंड प्रभारी शालिनी सिंह पटेल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके साथ ही उन्होंने संबंधित प्रकरण में एक शिकायती पत्र के माध्यम से राज्य सरकार और प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।
अपने शिकायती पत्र में उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष एवं न्यायिक जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने संबंधित व्यक्तियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) निकलवाकर मामले की गहन जांच कराने तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
अस्पताल के रिकॉर्ड को लेकर भी उठे सवाल
मामले के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। आरोप है कि ड्यूटी रोस्टर तैयार करने वाली कर्मचारी कार्यालय से अनुपस्थित हो गईं। वहीं ट्रामा सेंटर का स्टाफ भी मामले पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया देने से बच रहा है।
यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि उपस्थिति रजिस्टर को सुरक्षित रख दिया गया है तथा ड्यूटी रोस्टर को सार्वजनिक न करते हुए ताले में बंद कर दिया गया है। हालांकि इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
उठ रहे हैं कई अहम सवाल
- यदि कर्मचारी नियमित रूप से ड्यूटी पर उपस्थित नहीं थीं, तो पिछले दो वर्षों से वेतन किस आधार पर जारी किया गया?
- ड्यूटी रोस्टर और उपस्थिति रजिस्टर सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे?
- क्या स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा?
- यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई होगी?
संबंधित पक्ष का पक्ष आना बाकी
समाचार लिखे जाने तक मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) बांदा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS), जिला प्रशासन तथा सांसद कृष्णा पटेल एवं श्वेता पटेल की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
Anil Tiwari is a Senior Journalist with extensive experience in print, digital, and television journalism. He has covered a wide range of subjects, including governance, public policy, politics, rural development, environment, illegal mining, law and order, and social issues. His work is driven by factual reporting, investigative journalism, and in-depth analysis, with a strong commitment to public interest and ethical journalism. Over the years, he has consistently highlighted grassroots issues, giving voice to underserved communities through credible and impactful reporting.
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