ग्राम समाज की जमीन पर सालभर से अवैध कब्जे का आरोप, विधायक के फोन पर राजस्व टीम के लौटने का दावा
लेखपाल की रिपोर्ट के बाद भी नहीं हटा कब्जा, ग्राम पंचायत प्रशासक ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की
बाँदा/बिसंडा। उत्तर प्रदेश में सरकारी और ग्राम समाज की जमीनों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए प्रशासन की ओर से लगातार कार्रवाई का दावा किया जाता है, लेकिन बाँदा जिले के बिसंडा क्षेत्र से सामने आया एक मामला इन दावों पर सवाल खड़े कर रहा है। ग्राम तेंदुरा में ग्राम समाज की भूमि पर करीब एक वर्ष से अवैध कब्जा होने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि राजस्व अधिकारियों की रिपोर्ट और नोटिस के बावजूद जमीन को कब्जा मुक्त नहीं कराया जा सका।
मामला राजस्व ग्राम तेंदुरा की गाटा संख्या 647, रकबा 0.105 हेक्टेयर से जुड़ा है। ग्राम पंचायत प्रशासक रामलाल जयन द्वारा आयुक्त चित्रकूटधाम मंडल और जिलाधिकारी बाँदा को भेजी गई शिकायत के अनुसार, उक्त भूमि पर स्थानीय निवासी राजन सिंह पुत्र कपूर सिंह द्वारा अवैध कब्जा किए जाने का आरोप है।
लेखपाल ने दी थी अवैध कब्जे की रिपोर्ट
शिकायत में कहा गया है कि क्षेत्रीय लेखपाल आलोक कुमार ने 13 जून 2025 को अपनी रिपोर्ट में भूमि पर कथित अवैध कब्जे की पुष्टि की थी। इसके बाद उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर जमीन खाली करने के निर्देश दिए गए थे।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, नोटिस की समय-सीमा समाप्त होने के बावजूद जमीन से कब्जा नहीं हटाया गया। आरोप है कि इसके बाद भी संबंधित स्तर से प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
तहसीलदार ने गठित की राजस्व टीम
मामले में दोबारा कार्रवाई की मांग को लेकर ग्राम पंचायत प्रशासक ने 7 अगस्त 2026 को तहसीलदार अतर्रा के समक्ष शिकायत की। शिकायत के अनुसार, तहसीलदार ने 18 अगस्त 2026 को आदेश संख्या 2816 जारी कर नायब तहसीलदार शिवदीप के नेतृत्व में राजस्व टीम गठित की।
टीम को गाटा संख्या 645, 647, 1474 और 2328 से कथित अवैध कब्जे हटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। कार्रवाई के लिए 20 अगस्त 2026 की तारीख निर्धारित किए जाने का भी शिकायत में उल्लेख है।
विधायक के फोन पर टीम लौटने का आरोप ?
सबसे गंभीर आरोप कार्रवाई वाले दिन को लेकर लगाया गया है। ग्राम पंचायत प्रशासक की आईजीआरएस शिकायत, संदर्भ संख्या 40017026020614, के अनुसार राजस्व टीम मौके पर कार्रवाई के लिए जाने वाली थी, तभी एक स्थानीय विधायक का फोन आने का दावा किया गया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि फोन आने के बाद टीम मौके पर जाने के बजाय वापस लौट गई और प्रस्तावित बेदखली की कार्रवाई नहीं हो सकी। हालांकि, विधायक की ओर से इस कथित फोन कॉल या लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी शिकायत में नहीं दी गई है।
लेखपाल की भूमिका की जांच की मांग
ग्राम पंचायत प्रशासक ने मामले में संबंधित लेखपाल की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि लेखपाल और कथित कब्जाधारी के बीच मिलीभगत की जांच होनी चाहिए।
इसके अलावा शिकायतकर्ता ने दूसरी तहसील के अधिकारियों से निष्पक्ष जांच, संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल तथा कार्रवाई वाले दिन के सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी नजर
मामला सामने आने के बाद अब निगाहें जिलाधिकारी बाँदा और मंडलायुक्त चित्रकूटधाम मंडल पर हैं। मुख्य सवाल यह है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कब तक होती है और यदि ग्राम समाज की भूमि पर अवैध कब्जा प्रमाणित होता है तो प्रशासन उसे कब तक कब्जा मुक्त कराता है।
फिलहाल, विधायक के कथित फोन, राजस्व टीम के लौटने और लेखपाल की भूमिका से जुड़े आरोप शिकायतकर्ता के दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।