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तहबाजारी के नाम पर वसूली का खेल ? हाईवे पर बैरियर-रस्सी लगाकर वाहन रोकने पर सवाल
मध्यप्रदेश से आने वाले वाहनों से शुल्क वसूली के आरोप; नियम विरुद्ध वसूली बनी चर्चा का विषय, कार्रवाई की मांग तेज
बांदा। मध्यप्रदेश सीमा से बांदा में प्रवेश करने वाले वाहनों से तहबाजारी के नाम पर कथित वसूली को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। गिरवां, मटौंध, नरैनी समेत सीमा से जुड़े मार्गों पर वाहनों को रोककर शुल्क लिए जाने के आरोपों के बाद यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। शिकायतकर्ताओं ने मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग तेज कर दी है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि तहबाजारी वसूली के लिए निर्धारित स्थल पहले से तय हैं तो राज्यमार्ग अथवा हाईवे पर बैरियर या रस्सी लगाकर वाहनों को रोकने का अधिकार किस नियम के तहत दिया गया है। उनका कहना है कि वसूली व्यवस्था से संबंधित आदेश और वैधानिक प्रावधान स्पष्ट किए जाने चाहिए।
टेंडर की शर्तें सार्वजनिक करने की मांग
मामले में संबंधित टेंडर और नीलामी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मांग की गई है कि ठेके की नीलामी शर्तें,
अधिकृत वसूली स्थल, वाहनों की श्रेणी, शुल्क की दरें और संबंधित शासनादेश सार्वजनिक किए जाएं।
इन दस्तावेजों से स्पष्ट हो सकेगा कि ठेकेदार को किन स्थानों पर और किन वाहनों से शुल्क लेने का अधिकार दिया गया है।
जिला पंचायत की भूमिका पर भी सवाल
शिकायतकर्ताओं ने अपर मुख्य अधिकारी और जिला पंचायत अध्यक्ष की भूमिका पर भी आरोप लगाए हैं। कथित वसूली को संरक्षण या सहयोग दिए जाने की बात कही गई है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इसके अलावा कुछ जिला पंचायत सदस्यों के कथित रूप से वसूली व्यवस्था में शामिल होने और कुछ पत्रकारों को मासिक भुगतान किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। पत्रकारों द्वारा वसूली का ठेका लिए जाने की बात भी सामने आई है। इन आरोपों की वास्तविकता निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।
हाईवे पर वसूली की अनुमति किसकी है ?
मामले का प्रमुख बिंदु यह है कि हाईवे या राज्यमार्ग पर वाहनों को रोकने के लिए बैरियर अथवा रस्सी लगाने की अनुमति किस सक्षम प्राधिकारी ने दी है। यदि ऐसी व्यवस्था वैध है तो संबंधित आदेश और नियम सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
वहीं, यदि वसूली निर्धारित नियमों के विपरीत पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है।
जांच के बाद साफ होगी तस्वीर
अब मांग उठ रही है कि जिला प्रशासन टेंडर प्रक्रिया से लेकर वसूली के अधिकृत स्थानों तक पूरे मामले की जांच कराए। दस्तावेज सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वर्तमान वसूली व्यवस्था नियमों के अनुरूप है अथवा नहीं।
फिलहाल लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में निष्पक्ष जांच और संबंधित अभिलेखों का सार्वजनिक होना जरूरी माना जा रहा है।

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