स्लीपर बस से 2,000 के स्पीकर मंगाने पर ₹4,700 की मांग
पहले भी जीएसटी एवं टैक्स विभागों की कार्रवाई का दावा, पार्सल के नाम पर अतिरिक्त रुपये वसूलने का आरोप आए दिन स्लीपर बस से पार्सल ढोने को लेकर होते हैं विवाद

बांदा। जिले के जसपुरा थाना क्षेत्र में दिल्ली से स्लीपर बस के माध्यम से स्पीकर मंगाने को लेकर विवाद सामने आया है। करीब 2,000 रुपये कीमत के स्पीकर को वापस लेने के लिए 4,700 रुपये अतिरिक्त मांगने का आरोप लगाते हुए युवक ने पुलिस से न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित का आरोप है कि निर्धारित किराये और सामान की कीमत का भुगतान पहले ही किए जाने के बावजूद ट्रैवल्स संचालक स्पीकर वापस नहीं कर रहा है। वहीं, संचालक ने गाड़ी पर हुए चालान का हवाला देते हुए 4,700 रुपये जमा करने के बाद ही सामान लौटाने की बात कही है।
जसपुरा निवासी सुनील कुमार पुत्र दरबारी के अनुसार, 14 अक्टूबर 2026 को उसने दिल्ली से स्पीकर खरीदा था। सामान बांदा मंगाने के लिए उसने कल्पना ट्रैवल्स के माध्यम से साईं आनंद ट्रैवल्स से संपर्क किया। पीड़ित का कहना है कि स्पीकर की कीमत और निर्धारित किराये का भुगतान पहले ही कर दिया गया था।
पीड़ित के मुताबिक, 28 अक्टूबर को जब वह बांदा स्थित ट्रैवल्स कार्यालय पहुंचा, तो उससे कथित तौर पर 4,700 रुपये अतिरिक्त और 300 रुपये किराया मांगा गया। आरोप है कि अतिरिक्त रकम जीएसटी चालान के नाम पर मांगी गई। पहले भुगतान किए जाने की बात कहकर अतिरिक्त रुपये देने से इनकार करने पर उसे स्पीकर देने से मना कर दिया गया।
112 पर दी सूचना, सामान नहीं मिलने का आरोप
सुनील कुमार ने बताया कि विवाद होने पर उसने 112 नंबर पर फोन कर पुलिस को सूचना दी। पीड़ित का आरोप है कि मौके पर पहुंची पुलिस ने उसकी शिकायत सुनी, लेकिन उसे स्पीकर वापस नहीं दिलाया। इसके बाद उसने संबंधित अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की।
ट्रैवल्स एजेंट व संचालक ने चालान का दिया हवाला
मामले में ट्रैवल्स संचालक से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया। संचालक ने कथित तौर पर कहा कि जीएसटी नहीं होने के कारण गाड़ी पकड़ी गई थी और उस पर चालान हुआ था। संचालक के मुताबिक, 4,700 रुपये चालान के भुगतान के रूप में दिए जाने के बाद ही सामान वापस किया जाएगा, अन्यथा स्पीकर नहीं लौटाया जाएगा।
पहले भी कार्रवाई होने के दावे पर उठे सवाल
मामले में जीएसटी एवं टैक्स विभागों की ओर से पहले भी कार्रवाई किए जाने का दावा सामने आया है। हालांकि, पूर्व की कार्रवाई कब हुई, किस विभाग ने की और उसका आधार क्या था, इसकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। इसी तरह, गाड़ी पर हुए कथित चालान और उसमें दर्ज कारणों की भी दस्तावेजों के आधार पर जांच आवश्यक है।
अब सवाल यह है कि गाड़ी पर हुए कथित चालान की जिम्मेदारी किसकी है और ग्राहक के पार्सल को रोककर चालान की रकम वसूलने का क्या वैधानिक आधार है। पीड़ित ने संबंधित अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराकर स्पीकर वापस दिलाने और जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।