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बांदा में मंत्री रामकेश निषाद का पुलिस के खिलाफ धरना

बांदा में जलशक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद ई-रिक्शा चालक की शिकायत पर पुलिस के खिलाफ धरने पर बैठे। सीओ सिटी के कार्रवाई के आश्वासन पर करीब चार घंटे बाद धरना समाप्त हुआ।

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बांदा में राज्यमंत्री रामकेश निषाद का पुलिस के खिलाफ धरना, चार घंटे बाद खत्म हुआ प्रदर्शन

ई-रिक्शा चालक ने मारपीट, नौ हजार रुपये छीनने और पुलिसकर्मियों पर अभद्रता के लगाए आरोप; सीओ सिटी के कार्रवाई के आश्वासन पर माने राज्यमंत्री

बांदा। उत्तर प्रदेश के बांदा में रविवार, 25 अक्टूबर को पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर उस समय राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब प्रदेश सरकार के जलशक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद अपनी ही सरकार के पुलिस प्रशासन के खिलाफ शहर कोतवाली के सामने धरने पर बैठ गए। एक ई-रिक्शा चालक की शिकायत पर कार्रवाई की मांग को लेकर शुरू हुआ यह घटनाक्रम करीब चार घंटे तक चला। अंततः सीओ सिटी सौरभ सिंह के ठोस कार्रवाई के आश्वासन पर राज्यमंत्री ने धरना समाप्त कर दिया। धरना खत्म होने के बाद मंत्री मीडिया से बातचीत किए बिना सर्किट हाउस रवाना हो गए।

ई-रिक्शा चालक ने मारपीट और नौ हजार रुपये छीनने का लगाया आरोप

मामला शहर कोतवाली क्षेत्र के छावनी डेरा, मजरा दरदा निवासी ई-रिक्शा चालक लालभइया पुत्र रामसजीवन से जुड़ा है। पीड़ित ने 25 अक्टूबर को कोतवाली प्रभारी को प्रार्थना पत्र देकर कुछ लोगों पर मारपीट, रुपये छीनने और धमकी देने के आरोप लगाए।

शिकायत के अनुसार, 24 अक्टूबर को सुबह करीब 11 बजे लालभइया अपना ई-रिक्शा लेकर जा रहा था। आरोप है कि छावनी डेरा तिराहे के पास हर्षित यादव, मोहित यादव, राजकरण यादव और दो अज्ञात लोगों ने उसका रिक्शा रोक लिया। पीड़ित का आरोप है कि उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई तथा रिक्शे की किस्त जमा करने के लिए रखे नौ हजार रुपये छीन लिए गए।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि उससे हर महीने दस हजार रुपये देने की मांग की गई। रुपये नहीं देने पर ई-रिक्शा नहीं चलाने देने और जान से मारने की धमकी दिए जाने की बात भी कही गई है।

कृषि विश्वविद्यालय चौकी के दरोगा पर भी अभद्रता का आरोप

पीड़ित के मुताबिक, घटना की शिकायत लेकर वह कृषि विश्वविद्यालय चौकी पहुंचा, जहां तैनात दरोगा दीपक कुमार सैनी पर उसने कथित तौर पर अभद्रता और मारपीट करने का आरोप लगाया। शिकायतकर्ता का दावा है कि उससे उठक-बैठक कराई गई और शिकायत करने पर जेल भेजने की धमकी दी गई।

पीड़ित ने आरोप लगाया कि घर लौटते समय रास्ते में उसके साथ दोबारा मारपीट की गई, जिससे उसके शरीर और आंख में चोटें आईं। इसके बाद रात में शहर कोतवाली पहुंचने पर दरोगा प्रभुनाथ यादव पर भी धमकाने, मारपीट करने और रिपोर्ट दर्ज किए बिना वापस भेजने का आरोप लगाया गया है।

शिकायतकर्ता ने शिवसागर और दुर्वेन्द्र को घटना से संबंधित गवाह बताते हुए आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की मांग की। इन आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित पक्षों के आधिकारिक पक्ष से होनी बाकी है।

अधिकारियों के समझाने पर भी कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे मंत्री

ई-रिक्शा चालक की शिकायत और पुलिसकर्मियों पर लगाए गए आरोपों को लेकर राज्यमंत्री रामकेश निषाद कोतवाली के सामने धरने पर बैठ गए। सूचना मिलने पर सीओ सिटी सौरभ सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने मंत्री को समझाकर धरना समाप्त कराने का प्रयास किया, लेकिन मंत्री कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।

करीब चार घंटे तक चले घटनाक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों, भाजपा नेताओं और मीडियाकर्मियों की मौजूदगी में गहमागहमी बनी रही। अंततः सीओ सिटी के ठोस कार्रवाई के आश्वासन के बाद राज्यमंत्री ने धरना समाप्त कर दिया।

घटनाक्रम के बाद मामले में प्राथमिकी दर्ज किए जाने और कानूनी कार्रवाई शुरू होने की बात सामने आई। हालांकि, प्राथमिकी के विवरण तथा आरोपित व्यक्तियों और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की विस्तृत आधिकारिक जानकारी स्पष्ट होना बाकी है।

धरना समाप्त करने के बाद राज्यमंत्री रामकेश निषाद मीडिया से बातचीत किए बिना सर्किट हाउस चले गए। ऐसे में पूरे मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर पुलिस प्रशासन के आधिकारिक रुख पर निगाहें टिकी हैं।

मंत्री के धरने से पुलिस की जवाबदेही पर उठे सवाल

बांदा में हुए इस घटनाक्रम ने आम नागरिकों की शिकायतों के निस्तारण और पुलिस की जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि किसी शिकायतकर्ता को अपनी फरियाद दर्ज कराने में परेशानी होती है और वह पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी आरोप लगाता है, तो मामले की निष्पक्ष जांच और शिकायत के विधिसम्मत निस्तारण की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की होती है।

सबसे अहम सवाल यह है कि जब प्रदेश सरकार के एक राज्यमंत्री को भी पीड़ित की शिकायत पर कार्रवाई की मांग के लिए कोतवाली के सामने धरने पर बैठना पड़े, तो आम नागरिकों की शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?

अब इस मामले में पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच, संबंधित पक्षों का बयान और जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकेगी।

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ANIL TIWARI

Anil Tiwari

Anil Tiwari is a Senior Journalist with extensive experience in print, digital, and television journalism. He has covered a wide range of subjects, including governance, public policy, politics, rural development, environment, illegal mining, law and order, and social issues. His work is driven by factual reporting, investigative journalism, and in-depth analysis, with a strong commitment to public interest and ethical journalism. Over the years, he has consistently highlighted grassroots issues, giving voice to underserved communities through credible and impactful reporting.

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