बांदा के नरैनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सर्जन की तैनाती के बावजूद ऑपरेशन नहीं होने पर समाजसेवी उमेश तिवारी ने CMO कार्यालय की कार्यप्रणाली और संसाधनों की कमी को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
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बांदा: सर्जन की तैनाती के बावजूद नरैनी अस्पताल में नहीं हो रहे ऑपरेशन, समाजसेवी उमेश तिवारी ने CMO कार्यालय पर लगाए गंभीर आरोप
सर्जन की तैनाती के बावजूद नरैनी अस्पताल में नहीं हो रहे ऑपरेशन, समाजसेवी ने CMO कार्यालय पर लगाए गंभीर आरोप
बांदा। जनपद की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। समाजसेवी उमेश तिवारी ने आरोप लगाया है कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय की लापरवाही और शासन स्तर पर समुचित निगरानी के अभाव के कारण योग्य चिकित्सकों का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है, जिससे आम जनता बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हो रही है।
समाजसेवी उमेश तिवारी का कहना है कि डॉ. विकास यादव, जो कि एक सर्जन हैं, की तैनाती नरैनी सरकारी अस्पताल में की गई है। लेकिन जिस स्तर की विशेषज्ञता उनके पास है, उस स्तर के ऑपरेशन थिएटर, आवश्यक सर्जिकल उपकरण, आधुनिक मशीनें और जांच सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। परिणामस्वरूप, उनकी तैनाती के बावजूद अस्पताल में एक भी बड़ा ऑपरेशन नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति की जाती है तो उसके अनुरूप संसाधन उपलब्ध कराना भी स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है। लेकिन नरैनी अस्पताल में यह व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीजों को जिला अस्पताल अथवा निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
उमेश तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि दूसरी ओर जिला अस्पताल बांदा में संविदा पर सर्जन की नियुक्ति की गई है, जबकि वहां पहले से सुविधाएं उपलब्ध हैं। उनका दावा है कि जिला अस्पताल से मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर रेफर किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी अस्पतालों में भेजा जाता है, जहां उनसे भारी-भरकम शुल्क वसूला जाता है।
समाजसेवी का कहना है कि जहां योग्य विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद हैं, वहां आवश्यक संसाधन नहीं हैं और जहां संसाधन उपलब्ध हैं, वहां व्यवस्था का लाभ मरीजों के बजाय निजी अस्पतालों को मिलने का आरोप लग रहा है। उन्होंने इसे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता बताया।
उन्होंने CMO कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कार्यालय में प्रशासनिक कार्यप्रणाली अत्यधिक बाबूगिरी से प्रभावित है, जिससे समय पर निर्णय नहीं हो पाते और स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन प्रभावित होता है।
उमेश तिवारी ने शासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही नरैनी अस्पताल में सर्जरी से संबंधित सभी आवश्यक उपकरण, प्रशिक्षित स्टाफ और जांच सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं ताकि विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाओं का लाभ स्थानीय जनता को मिल सके।
हालांकि, इन आरोपों पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) बांदा अथवा संबंधित स्वास्थ्य विभाग की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई । यदि विभाग की ओर से कोई स्पष्टीकरण प्राप्त होता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
Anil Tiwari is a Senior Journalist with extensive experience in print, digital, and television journalism. He has covered a wide range of subjects, including governance, public policy, politics, rural development, environment, illegal mining, law and order, and social issues. His work is driven by factual reporting, investigative journalism, and in-depth analysis, with a strong commitment to public interest and ethical journalism. Over the years, he has consistently highlighted grassroots issues, giving voice to underserved communities through credible and impactful reporting.
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