जिला पंचायत की खनिज तहबाजारी बनी विवाद का अखाड़ा
एमपी से आने वाले ट्रकों को मुख्य सड़क पर रोककर वसूली के आरोप, खनिज नीति के नियमों की अनदेखी का दावा
डंडे के बल पर वसूली और वाहन चालकों से अभद्रता की शिकायतें; जिला पंचायत प्रशासक बोले—शिकायतें मिलीं, जांच व कार्रवाई के निर्देश, ठेकेदार को चेतावनी पत्र
बांदा। जिला पंचायत की खनिज तहबाजारी इन दिनों राजस्व वसूली से ज्यादा विवाद का विषय बनती जा रही है। मध्य प्रदेश से बांदा आने वाले खनिज लदे ट्रकों से तहबाजारी वसूली की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ट्रक चालकों का आरोप है कि उत्तर प्रदेश की खनिज नीति के निर्धारित नियमों और मानकों का पालन किए बिना वसूली की जा रही है। इतना ही नहीं, निर्धारित वसूली प्वाइंट से हटकर मुख्य मार्ग पर पहुंचकर ट्रकों को रोकने और रकम वसूलने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
मामला केवल वसूली तक सीमित नहीं है। आरोप है कि ठेकेदार के कर्मचारी कथित तौर पर डंडे लेकर सड़क पर खड़े रहते हैं और ट्रकों को रोककर भुगतान के लिए दबाव बनाते हैं। वाहन चालकों से अभद्रता किए जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। यदि ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो सवाल महज ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर नहीं, बल्कि जिला पंचायत और प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी उठना तय है।
नियमों की किताब अलग, सड़क पर वसूली का तरीका अलग?
तहबाजारी वसूली के लिए निर्धारित स्थान और प्रक्रिया होने के बावजूद मुख्य सड़क पर वाहनों को रोकने के आरोप ने पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सवाल यह है कि जब वसूली का प्वाइंट निर्धारित है तो सड़क पर जाकर ट्रकों को रोकने की जरूरत क्यों पड़ रही है?
वाहन चालकों का आरोप है कि उन्हें रास्ते में रोककर वसूली की जाती है। ऐसे में यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि वसूली करने वाले लोगों को मुख्य मार्ग पर वाहनों को रोकने का अधिकार किस आदेश या प्रावधान के तहत मिला है।
खनिज नीति का पालन हो रहा है तो सामने आए नियम
सबसे गंभीर आरोप उत्तर प्रदेश खनिज नीति के नियमों की अनदेखी का है। वाहन चालकों का कहना है कि यदि तहबाजारी वसूली पूरी तरह निर्धारित नियमों के मुताबिक हो रही है तो जिला पंचायत को वसूली की दर, निर्धारित प्वाइंट और अधिकृत प्रक्रिया को स्पष्ट करना चाहिए।
सवाल यह भी है कि क्या प्रत्येक वाहन से निर्धारित दर के अनुसार ही राशि ली जा रही है? क्या प्रत्येक भुगतान की विधिवत रसीद दी जा रही है? क्या वसूली करने वाले कर्मचारियों की पहचान और प्राधिकरण स्पष्ट है? यदि इन सवालों का जवाब हां है तो पूरी व्यवस्था को सार्वजनिक करने में आपत्ति क्यों होनी चाहिए ?
डंडा लेकर सड़क पर खड़े लोग कौन?
वाहन चालकों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों में सबसे चिंताजनक बात डंडे के इस्तेमाल और कथित दबाव की है। आरोप है कि ठेकेदार के कुछ कर्मचारी सड़क पर डंडे लेकर खड़े होते हैं और ट्रकों को रोकते हैं। चालकों के साथ अभद्रता और दबाव बनाए जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
यदि किसी शुल्क की वसूली वैध है तो उसे डंडे के सहारे कराने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है? और यदि कोई व्यक्ति वाहन रोकने या वसूली के नाम पर चालक से अभद्रता करता है तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी?
शिकायतें मिलीं, जांच और कार्रवाई के निर्देश

मामले में जिला पंचायत प्रशासन ने भी शिकायतों का संज्ञान लिया है। जिला पंचायत प्रशासक सुनील सिंह पटेल ने बताया कि खनिज तहबाजारी को लेकर शिकायतें मिली हैं। उन्होंने कहा कि मामले में जांच और कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। साथ ही ठेकेदार को भी संबंधित मामले में चेतावनी पत्र भेजा गया है।
जिला पंचायत प्रशासक के इस बयान के बाद अब जांच की कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं। महत्वपूर्ण यह होगा कि जांच केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहती है या मौके पर जाकर वसूली की वास्तविक प्रक्रिया, निर्धारित प्वाइंट और ठेकेदार के कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जाती है।
जिला पंचायत की भूमिका पर भी उठे सवाल
ठेका देने के बाद क्या जिला पंचायत ने वसूली व्यवस्था की नियमित निगरानी की? क्या अधिकारियों ने मौके पर जाकर जांच की कि ठेकेदार के कर्मचारी निर्धारित प्वाइंट पर ही वसूली कर रहे हैं या नहीं? क्या शिकायतों की कोई प्रभावी निगरानी व्यवस्था है?
इन सवालों का जवाब इसलिए जरूरी है क्योंकि यह व्यवस्था सीधे सार्वजनिक मार्ग और खनिज परिवहन से जुड़ी है। यदि ठेकेदार को नियमों के अनुसार वसूली का अधिकार दिया गया है तो उसे नियमों के दायरे में ही रहकर काम करना होगा।
प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर
अब जबकि जिला पंचायत प्रशासक ने शिकायतें मिलने और ठेकेदार को चेतावनी पत्र भेजे जाने की पुष्टि की है, प्रशासन की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण हो गई है। जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि मुख्य मार्ग पर वाहन रोककर वसूली की जा रही थी या नहीं, क्या वसूली निर्धारित प्वाइंट और स्वीकृत दरों के अनुरूप हो रही है तथा वाहन चालकों से अभद्रता और कथित दबाव के आरोपों में कितनी सच्चाई है।
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए ठेके की शर्तें, निर्धारित वसूली प्वाइंट, स्वीकृत दर, रसीद व्यवस्था और वसूली करने वाले कर्मचारियों की अधिकृत सूची की भी जांच आवश्यक है।
अब सवाल सिर्फ तहबाजारी वसूली का नहीं, बल्कि नियम और अधिकार की सीमा का है। यदि व्यवस्था नियमों के मुताबिक है तो प्रशासन को इसे स्पष्ट करना चाहिए और यदि नियमों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी दिखाई देनी चाहिए। जिला पंचायत प्रशासक द्वारा जांच के निर्देश और ठेकेदार को चेतावनी पत्र भेजे जाने के बाद अब देखना होगा कि यह मामला महज चेतावनी तक सिमटता है या जांच के बाद जिम्मेदारी भी तय होती है।