कैसे चले मेडिकल कॉलेज ? 108 की जरूरत के बीच परमानेंट महज 28 डॉक्टर
जेडीयू की समीक्षा बैठक में मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं पर खुलकर उठे सवाल, प्राचार्य ने डॉक्टरों की उपलब्धता को लेकर दी जानकारी
बांदा। रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं को लेकर जेडीयू पदाधिकारियों की समीक्षा बैठक में कई अहम बातें खुलकर सामने आईं। चिकित्सकों की कमी, उनकी नियमित उपलब्धता, नर्सिंग स्टाफ की समस्याओं और सीएमएस की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर बैठक में गंभीर सवाल उठाए गए।
बैठक के दौरान रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने स्वयं जानकारी देते हुए बताया कि मेडिकल कॉलेज में महज 28 डॉक्टर ही परमानेंट हैं। बैठक में यह भी बताया गया कि इन स्थायी डॉक्टरों में भी करीब आधे डॉक्टर छुट्टी अथवा अन्य कारणों से नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहते।
मेडिकल कॉलेज में 108 डॉक्टरों की आवश्यकता के मुकाबले करीब 60 डॉक्टरों की तैनाती बताई गई। ऐसे में स्थायी चिकित्सकों की सीमित संख्या और उनकी उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

डॉ. सरावगी और डॉ. बंसल को लेकर भी उठे सवाल
समीक्षा बैठक में सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक डॉ. सरावगी और डॉ. बंसल की भूमिका को लेकर सामने आई। बैठक में मौजूद लोगों की ओर से आरोप लगाया गया कि दोनों अधिकारी प्राचार्य के बेहद करीबी और महत्वपूर्ण सहयोगियों के रूप में काम करते हैं।
बैठक में यह भी आरोप लगाया गया कि डॉ. सरावगी और डॉ. बंसल को लेकर आए दिन स्टाफ के बीच विवाद की स्थिति बनती है तथा मरीजों और तीमारदारों की ओर से भी असंतुष्टि की शिकायतें सामने आती रहती हैं।
बैठक में सवाल उठाया गया कि यदि इन दोनों अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार शिकायतें और विवाद सामने आ रहे हैं तो मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा उनकी भूमिका की निष्पक्ष समीक्षा या जांच क्यों नहीं कराई जाती।
आरोप लगाने वाले पदाधिकारियों और लोगों का कहना था कि प्राचार्य के दो ‘अनमोल रत्न’ कहे जाने वाले इन अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई अथवा जांच बैठाने की स्थिति क्यों नहीं बन पा रही है। हालांकि यह टिप्पणी बैठक में मौजूद लोगों की ओर से की गई, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
सीएमएस की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल
बैठक में डॉ. रजनी भारती के सीएमएस पद पर रहते हुए डॉ. सरावगी द्वारा सीएमएस का कार्य देखे जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए।
कई महिलाओं ने अपनी समस्याएं बताते हुए आरोप लगाया कि कागजों में सीएमएस के रूप में डॉ. रजनी भारती का नाम होने के बावजूद डॉ. सरावगी द्वारा सीएमएस का काम देखा जाता है और वे स्वयं को सीएमएस के रूप में बताते हैं।
महिलाओं का कहना था कि इस व्यवस्था को लेकर स्टाफ, मरीजों और तीमारदारों में असंतोष की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने मांग की कि सीएमएस की जिम्मेदारी और अधिकारों की स्थिति स्पष्ट की जाए तथा अस्पताल प्रशासन की जवाबदेही तय हो।
अब जांच और जवाबदेही का सवाल
जेडीयू पदाधिकारियों ने कहा कि मेडिकल कॉलेज बुंदेलखंड के बड़े हिस्से के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण चिकित्सा संस्थान है। ऐसे में चिकित्सकों की उपलब्धता, नियमित ड्यूटी और प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता जरूरी है।
बैठक में उठे सवालों के बाद अब प्रमुख मांग यह है कि मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की वास्तविक उपलब्धता, ड्यूटी व्यवस्था, सीएमएस की प्रशासनिक भूमिका तथा डॉ. सरावगी और डॉ. बंसल से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य के सामने स्टाफ और मरीजों से जुड़ी शिकायतें लगातार उठ रही हैं, तो क्या इन शिकायतों की स्वतंत्र जांच कराकर जिम्मेदारी तय की जाएगी?
नोट: डॉ. सरावगी और डॉ. बंसल से संबंधित आरोप बैठक में मौजूद लोगों द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। संबंधित दोनों अधिकारियों तथा मेडिकल कॉलेज प्रशासन का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।