गुलमोहर जमीन विवाद में पत्रकारों को मुकदमे में घसीटने पर आक्रोश, सीओ नरैनी के जांच व निलंबन की मांग
पत्रकारों ने डीएम और डीआईजी को सौंपा ज्ञापन, प्रवीण यादव पर पद और अधिकारों के दुरुपयोग के आरोप; कार्रवाई नहीं हुई तो जल्द होगा बड़ा आंदोलन
बांदा। गुलमोहर इको विलेज रिजॉर्ट से जुड़े जमीन विवाद में पत्रकारों को मुकदमे में शामिल किए जाने और नोटिस जारी करने के आरोपों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मामले में पहले रिजॉर्ट के मैनेजर आशीष मिश्रा की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसके बाद सीओ नरैनी प्रवीण यादव की भूमिका, विवेचना के दौरान एससी-एसटी एक्ट की धाराएं बढ़ाए जाने और मामले से संबंधित खबरें प्रकाशित करने वाले पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

इसी प्रकरण को लेकर बुधवार को पत्रकारों ने जिलाधिकारी बांदा और डीआईजी को ज्ञापन सौंपकर सीओ नरैनी प्रवीण यादव के निलंबन तथा निष्पक्ष जांच की मांग की। पत्रकारों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
जमीन विवाद से शुरू हुआ मामला, पुलिस कार्रवाई पर सवाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुलमोहर इको विलेज रिजॉर्ट के मैनेजर आशीष मिश्रा की ओर से नरैनी थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पास की जमीन के दूसरे पक्ष ने पेड़ उखाड़ दिए हैं। वहीं, दूसरे पक्ष का दावा है कि रिजॉर्ट का निर्माण उनकी जमीन पर कथित अवैध कब्जा करके कराया जा रहा था। उनका कहना है कि इस संबंध में पहले भी संबंधित अधिकारियों और विभागों को शिकायत दी गई थी।
जमीन विवाद को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच मामला पुलिस तक पहुंचा। इसके बाद मुकदमे की विवेचना और धाराओं में बदलाव को लेकर विवाद बढ़ गया। शिकायतकर्ता पक्ष ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
सीओ नरैनी की भूमिका पर उठाए सवाल
पत्रकारों का आरोप है कि मामले की विवेचना के दौरान एससी-एसटी एक्ट की धाराएं बढ़ाई गईं और जमीन विवाद से संबंधित घटनाक्रम की खबरें प्रकाशित करने वाले पत्रकारों को भी मुकदमे में शामिल कर लिया गया।
पत्रकारों ने आरोप लगाया कि पूरे प्रकरण में पुलिस के पद और अधिकारों के कथित दुरुपयोग की आशंका है। उन्होंने मांग की कि मुकदमा दर्ज होने से लेकर विवेचना, धाराएं बढ़ाने और पत्रकारों को नोटिस जारी करने तक की पूरी प्रक्रिया की बिंदुवार जांच कराई जाए।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पुलिस अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
पत्रकारों को नोटिस जारी करने पर बढ़ा आक्रोश
मामले से संबंधित पक्षों के बयान लेने और समाचार प्रकाशित करने वाले पत्रकारों को नोटिस जारी किए जाने के आरोपों ने विवाद को और बढ़ा दिया है। पत्रकारों का कहना है कि जनहित से जुड़े मामलों में संबंधित पक्षों का बयान लेना और तथ्यों के आधार पर समाचार प्रकाशित करना पत्रकारिता का दायित्व है।
यदि किसी समाचार को लेकर आपत्ति है तो उसका समाधान कानूनसम्मत प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए। पत्रकारों ने सवाल उठाया कि समाचार संकलन और प्रकाशन के कारण उन्हें आपराधिक मुकदमे में शामिल करने का आधार क्या है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
पत्रकार रामकिशोर उपाध्याय ने एडीजी से की मुलाकात
प्रकरण में पत्रकार रामकिशोर उपाध्याय ने अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने पत्रकारों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी।
इसके बाद पत्रकारों ने जिलाधिकारी बांदा और मंडलायुक्त को ज्ञापन सौंपकर सीओ नरैनी प्रवीण यादव के निलंबन की मांग उठाई। पत्रकारों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच के साथ यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि पत्रकारों को मुकदमे में शामिल करने का आधार क्या है।
निलंबन नहीं हुआ तो जल्द होगा बड़ा आंदोलन
ज्ञापन के माध्यम से पत्रकारों ने प्रशासन से मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और सीओ नरैनी प्रवीण यादव को निलंबित किया जाए। पत्रकारों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बड़े आंदोलन की घोषणा की जाएगी।
पत्रकारों का कहना है कि यह मामला केवल एक पत्रकार तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता, पत्रकारों की सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही से भी जुड़ा है।
अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। पत्रकारों ने चेतावनी दी है कि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा।