Article Body
खबरों से नाराज झोलाछाप डॉक्टरों ने मांगी थी मीडिया पर रोक, पत्रकारों ने डीएम-सीएमओ को सौंपा ज्ञापन
बांदा। जिले में कथित अवैध मेडिकल प्रैक्टिस को लेकर अब पत्रकारों और कुछ कथित झोलाछाप डॉक्टरों के बीच विवाद गहराता जा रहा है। बिना डिग्री, निर्धारित चिकित्सा योग्यता और वैध पंजीकरण के मेडिकल प्रैक्टिस किए जाने को लेकर वरिष्ठ पत्रकार आत्माराम त्रिपाठी एवं अन्य पत्रकार साथियों द्वारा लगातार खबरें प्रकाशित की जा रही थीं। खबरों के प्रकाशन के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई। इसी बीच कथित झोलाछाप डॉक्टरों ने मीडिया में प्रकाशित खबरों पर आपत्ति जताते हुए जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर खबरों पर रोक लगाने की मांग कर दी थी।
मामले में गर्गन पुरवा निवासी राजकुमार कुशवाहा पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि वह बीते कई वर्षों से बिना वैध चिकित्सा डिग्री, निर्धारित योग्यता और पंजीकरण के मेडिकल प्रैक्टिस कर रहे हैं। लगातार खबरें प्रकाशित होने और विभागीय कार्रवाई की आशंका के बीच कुछ कथित झोलाछाप डॉक्टरों ने अन्य लोगों के साथ मिलकर पत्रकारों के खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास किया। पत्रकारों ने इसे खबरों को दबाने की कथित साजिश बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई है। इस घटनाक्रम से जिले के पत्रकारों में आक्रोश व्याप्त हो गया।

चिकित्सा मित्र संगठन के पदाधिकारियों की भी जांच की मांग
पत्रकारों ने कथित चिकित्सा मित्र नामक संगठन और उसके पदाधिकारियों की शैक्षणिक योग्यता, चिकित्सा डिग्री एवं वैध पंजीकरण की जांच कराने की मांग उठाई है। साथ ही संगठन की वैधानिक स्थिति और उसकी गतिविधियों की भी जांच कराने की मांग की गई है।
शपथ पत्रों और आवेदनों में दर्ज नामों के आधार पर हो कार्रवाई
बांदा प्रेस ट्रस्ट के बैनर तले दर्जनों पत्रकारों ने जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा। पत्रकारों ने मांग की कि झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा प्रस्तुत शपथ पत्रों और संबंधित आवेदन पत्रों में दर्ज नामों के आधार पर सभी संदिग्ध लोगों को चिन्हित किया जाए। उनके चिकित्सा संबंधी दस्तावेजों, डिग्री, योग्यता और पंजीकरण की विस्तृत जांच कराई जाए।
इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों और संबंधित तकनीकी अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर स्थलीय एवं दस्तावेजी जांच कराने की मांग की गई। जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई करने तथा अवैध मेडिकल प्रैक्टिस पर प्रभावी रोक लगाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।
पत्रकारिता पर दबाव बर्दाश्त नहीं, निष्पक्ष जांच की मांग
पत्रकारों का कहना है कि जनहित में अवैध चिकित्सा गतिविधियों को उजागर करना मीडिया की जिम्मेदारी है। यदि किसी खबर पर आपत्ति है तो संबंधित व्यक्ति तथ्यों और दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रख सकता है, लेकिन खबरों को रोकने के लिए दबाव बनाना उचित नहीं है।
पत्रकारों ने प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।

Comments