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हत्या में उम्रकैद पा चुके तीन दोषियों पर गैंगस्टर एक्ट में भी शिकंजा
विशेष गैंगस्टर अदालत ने सुनाया फैसला, 6-6 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया
बांदा। हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा पा चुके तीन अभियुक्तों को गैंगस्टर एक्ट के मामले में भी अदालत ने दोषसिद्ध कर दिया। विशेष गैंगस्टर अदालत ने रामबहादुर सिंह उर्फ दाऊ सिंह, कल्लू सिंह और बलराम उर्फ बल्लू को चार-चार वर्ष के कठोर कारावास तथा छह-छह हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड जमा न करने पर प्रत्येक दोषी को दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट)/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीपाल सिंह ने थाना कोतवाली नगर से संबंधित करीब 12 वर्ष पुराने विशेष सत्र परीक्षण संख्या 18/2015 में 8 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाया। सजा सुनाए जाने के बाद तीनों दोषियों को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जिला कारागार बांदा भेजने के निर्देश दिए गए।
अदालत ने रामबहादुर सिंह उर्फ दाऊ सिंह निवासी कनवारा, कल्लू सिंह निवासी झील का पुरवा तथा बलराम उर्फ बल्लू निवासी कनवारा को उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 की धारा 3 के तहत दोषी माना।
आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता का आरोप
अभियोजन के अनुसार तीनों एक संगठित गिरोह के सदस्य थे और अपने तथा गिरोह के सदस्यों के आर्थिक एवं भौतिक लाभ के लिए आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहते थे। अभियोजन ने आरोपों के समर्थन में गैंगचार्ट, आपराधिक इतिहास, मूल मुकदमों के अभिलेख, एफआईआर, जीडी, आरोपपत्र तथा अभियोजन स्वीकृति सहित अन्य साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए।
अभियोजन के अनुसार तीनों के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, लूट एवं वसूली, मारपीट, बलवा, धमकी तथा शस्त्र अधिनियम समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज रहे हैं। गैंगचार्ट में धारा 386, 342, 353, 332, 323, 504 और 394 आईपीसी, धारा 25 आयुध अधिनियम तथा धारा 7 सीएल एक्ट समेत अन्य धाराओं के मुकदमों का उल्लेख किया गया है। हत्या के एक मामले में तीनों को पूर्व में आजीवन कारावास की सजा भी हो चुकी है।
एक अभियुक्त की मौत के बाद कार्यवाही समाप्त
मामले में शुरुआत में चार अभियुक्त नामजद थे। विचारण के दौरान अभियुक्त सुशील सिंह की मृत्यु हो गई। उसकी फौती आख्या एवं संबंधित अभिलेख न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने के बाद उसके विरुद्ध कार्यवाही समाप्त कर दी गई। शेष तीन अभियुक्तों के खिलाफ सुनवाई जारी रही।
मामले में राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह ने प्रभावी पैरवी की। पैरोकार अभिलाष यादव तथा कोर्ट मुहर्रिर रघुनाथ मौर्य और अमित कुमार ने भी आवश्यक अभिलेख एवं न्यायिक कार्यवाही में सहयोग किया। दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने तीनों को गैंगस्टर एक्ट की धारा 3 के तहत दोषी मानते हुए उक्त सजा सुनाई। पूर्व में बिताई गई अभिरक्षा की अवधि को नियमानुसार सजा में समायोजित करने का आदेश भी दिया गया।

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