जिला अस्पताल में 22 पैरामेडिकल पद रिक्त, आम जनता परेशान
बांदा। जिला अस्पताल पुरुष की स्वास्थ्य व्यवस्था इन दिनों गंभीर मानव संसाधन संकट से जूझ रही है। अस्पताल में पैरामेडिकल स्टाफ के कुल 22 पद रिक्त बताए जा रहे हैं। इनमें चीफ फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स, करीब आधा दर्जन सिस्टर, फिजियोथैरेपिस्ट समेत कई महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सीमित कर्मचारियों के सहारे अस्पताल की नियमित स्वास्थ्य सेवाएं किस तरह संचालित की जा रही हैं।
जिला अस्पताल पुरुष न केवल बांदा बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के बड़ी संख्या में मरीजों के लिए प्रमुख उपचार केंद्र है। प्रतिदिन यहां मरीजों की भारी भीड़ पहुंचती है। गंभीर मरीजों के उपचार में ट्रामा सेंटर की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन अस्पताल की विभिन्न सेवाओं के लिए आवश्यक पैरामेडिकल कर्मचारियों की कमी लगातार चिंता का विषय बनी हुई है।
चीफ फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स समेत कई पद खाली
अस्पताल में चार चीफ फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स तथा करीब आधा दर्जन सिस्टर के पद रिक्त बताए जा रहे हैं। इसके अलावा फिजियोथैरेपिस्ट समेत अन्य महत्वपूर्ण पैरामेडिकल पद भी खाली हैं।
पैरामेडिकल स्टाफ अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी होता है। मरीजों की देखभाल, दवा वितरण, वार्ड व्यवस्था, चिकित्सकों को उपचार में सहयोग और अन्य जरूरी सेवाएं काफी हद तक इसी स्टाफ पर निर्भर रहती हैं।
रिक्त पदों के कारण उपलब्ध कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार पड़ने की स्थिति बनती है। इसका असर अस्पताल की कार्यक्षमता और मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने की आशंका भी बनी रहती है।

समाजसेवी प्रेम पाण्डेय ने उठाए सवाल
समाजसेवी प्रेम पाण्डेय ने पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को विभागीय लापरवाही का परिणाम बताते हुए कहा कि, “पैरामेडिकल स्टाफ स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ की हड्डी है। अगर रीढ़ की हड्डी ही कमजोर हुई तो पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था धड़ाम हो जाएगी।”
उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र में लंबे समय तक महत्वपूर्ण पदों का रिक्त रहना गंभीर विषय है। स्वास्थ्य विभाग को चिकित्सकों के साथ पर्याप्त पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए।
ट्रामा सेंटर को आधुनिक बनाने की मांग
प्रेम पाण्डेय ने जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर को और अधिक आधुनिक बनाने तथा सुविधाओं का विस्तार करने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि बांदा बुंदेलखंड का महत्वपूर्ण जिला है और यहां सड़क दुर्घटनाओं समेत गंभीर मामलों के मरीज बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।
ऐसे में ट्रामा सेंटर में आधुनिक चिकित्सा उपकरण, बेहतर आपातकालीन सुविधाएं और पर्याप्त प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध कराया जाना जरूरी है। उन्होंने अस्पताल के अन्य वार्डों में भी सुविधाएं बढ़ाने, आवश्यक व्यवस्थाओं को मजबूत करने और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की मांग की।
उनका कहना है कि जिला अस्पताल को ऐसा सशक्त स्वास्थ्य केंद्र बनाया जाना चाहिए, जहां गंभीर मरीजों को प्राथमिक स्तर पर ही बेहतर और समयबद्ध उपचार मिल सके।
22 पद खाली, व्यवस्था पर उठे सवाल
जिला अस्पताल में गंभीर मरीजों के उपचार के लिए ट्रामा सेंटर अहम केंद्र है। इसके बावजूद अस्पताल की मूल पैरामेडिकल व्यवस्था में बड़ी संख्या में पद खाली होना सवाल खड़े करता है।
सवाल यह भी है कि जब जिला अस्पताल पुरुष में 22 पैरामेडिकल पद रिक्त हैं, तो मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने क्या वैकल्पिक इंतजाम किए हैं।
अपर निदेशक चिकित्सा एवं सीएमओ कार्यालय की भूमिका पर सवाल
पैरामेडिकल पदों की बड़ी संख्या में रिक्तता को लेकर संबंधित विभागीय स्तर पर भी सवाल उठ रहे हैं। अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से अपेक्षा की जा रही है कि जिला अस्पताल की मानव संसाधन स्थिति की समीक्षा कर रिक्त पदों को भरने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
आम जनता का सवाल सीधा है—जब जिला अस्पताल पुरुष में 22 पैरामेडिकल पद खाली हैं, तो मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार विभाग आखिर कब गंभीर कदम उठाएगा?
रिक्त पद भरने और सुविधाएं बढ़ाने की मांग
सरकारी अस्पताल आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण आबादी के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख सहारा हैं। ऐसे में चिकित्सकों के साथ पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता भी बेहद जरूरी है।
प्रेम पाण्डेय ने मांग की कि रिक्त पैरामेडिकल पदों को जल्द भरा जाए, ट्रामा सेंटर को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाए तथा अस्पताल के अन्य वार्डों और मूलभूत व्यवस्थाओं का विस्तार किया जाए।
अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर हैं कि जिला अस्पताल पुरुष की इन समस्याओं को लेकर कब ठोस पहल होती है। फिलहाल मरीजों और उनके परिजनों को बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था का इंतजार है।