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बांदा में CNG पंपों पर लो प्रेशर का संकट, हजारों वाहन चालक परेशान; ‘प्रेशर नहीं है’ कहकर लौटाई जा रहीं गाड़ियां
बांदा। जनपद में सीएनजी वाहनों की बढ़ती संख्या के बीच सीएनजी पंपों पर कम प्रेशर की समस्या वाहन चालकों के लिए परेशानी का बड़ा कारण बनती जा रही है। वाहन चालक घंटों कतार में खड़े होने के बाद जब सीएनजी भरवाने पहुंचते हैं तो कई बार उन्हें “प्रेशर नहीं है” कहकर वापस लौटा दिया जाता है। इससे न केवल वाहन चालकों का समय और ईंधन बर्बाद हो रहा है, बल्कि सीएनजी को वैकल्पिक एवं अपेक्षाकृत किफायती ईंधन के रूप में बढ़ावा देने के सरकारी दावों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
सभी CNG पंपों पर एक जैसी शिकायत का दावा
स्थानीय वाहन चालकों का कहना है कि बांदा में सीएनजी की उपलब्धता को लेकर लगातार समस्या बनी हुई है। कई बार पंप तक पहुंचने के बाद पता चलता है कि पर्याप्त प्रेशर उपलब्ध नहीं है। ऐसे में वाहन चालक सीएनजी भरवाए बिना ही वापस लौटने को मजबूर हो जाते हैं।
सबसे बड़ी परेशानी उन लोगों को होती है, जिनकी रोजी-रोटी ही वाहन संचालन पर निर्भर है। ऑटो, टैक्सी, निजी व्यावसायिक वाहन और अन्य सीएनजी वाहन चालकों को ईंधन के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। यदि पंप पर पहुंचने के बाद भी सीएनजी उपलब्ध न हो तो पूरा दिन प्रभावित हो जाता है।
हजारों गाड़ियों के सामने ईंधन का संकट
सीएनजी को पेट्रोल-डीजल के विकल्प के तौर पर अपनाने वाले वाहन चालकों की संख्या लगातार बढ़ी है। ऐसे में सीएनजी पंपों की पर्याप्त क्षमता, नियमित आपूर्ति और उचित प्रेशर बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है।
वाहन चालकों का सवाल है कि यदि सीएनजी पंपों पर पर्याप्त प्रेशर ही उपलब्ध नहीं रहेगा तो सीएनजी वाहन खरीदने और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की नीति का लाभ आम जनता को कैसे मिलेगा?
उनका कहना है कि सीएनजी वाहन खरीदने के बाद ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी संबंधित गैस आपूर्ति कंपनी और प्रशासन की जिम्मेदारी होनी चाहिए।
IGL अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
सीएनजी आपूर्ति व्यवस्था से जुड़ी इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। वाहन चालकों का आरोप है कि समस्या लंबे समय से सामने आने के बावजूद इसका स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है।
यदि किसी तकनीकी समस्या, आपूर्ति बाधा, पाइपलाइन क्षमता, कंप्रेसर या अन्य कारणों से सीएनजी पंपों पर प्रेशर प्रभावित हो रहा है तो संबंधित विभाग और कंपनी को इसकी नियमित निगरानी कर समस्या का समाधान करना चाहिए।
सरकार के वैकल्पिक ईंधन के दावों पर सवाल
सरकार की ओर से स्वच्छ और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की बात कही जाती रही है। सीएनजी को भी पेट्रोल-डीजल के विकल्प के तौर पर देखा जाता है। लेकिन जमीनी स्तर पर यदि वाहन चालकों को नियमित रूप से सीएनजी नहीं मिलती या कम प्रेशर के कारण वाहन बिना ईंधन के लौटाना पड़ता है, तो यह व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है।
वाहन चालकों का कहना है कि सिर्फ सीएनजी वाहनों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके लिए मजबूत और भरोसेमंद ईंधन आपूर्ति नेटवर्क भी जरूरी है।
सरकार से हस्तक्षेप की मांग
स्थानीय वाहन चालकों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। मांग की गई है कि बांदा के सीएनजी पंपों पर उपलब्धता और प्रेशर की वास्तविक स्थिति की जांच कराई जाए तथा यदि तकनीकी या आपूर्ति संबंधी समस्या है तो उसे तत्काल दूर कराया जाए।
वाहन चालकों का कहना है कि पंपों पर सीएनजी उपलब्धता, प्रेशर और तकनीकी खराबी से संबंधित स्पष्ट सूचना भी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि लोग बेवजह लंबी दूरी तय कर पंपों तक न पहुंचें।
अब देखना यह है कि सीएनजी की कम प्रेशर और उपलब्धता की समस्या को लेकर प्रशासन और इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड के अधिकारी क्या कदम उठाते हैं और हजारों सीएनजी वाहन चालकों को इस परेशानी से कब राहत मिलती है।

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