बांदा में मुख्यमंत्री का दौरा सम्पन्न, रानी अवंती बाई लोधी की प्रतिमा का अनावरण; होर्डिंग विवाद से ओबीसी राजनीति पर चर्चाएं तेज
बांदा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बांदा दौरा गुरुवार को सम्पन्न हो गया। मुख्यमंत्री ने कालू कुआं स्थित वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी की प्रतिमा का अनावरण कर समाज को सम्मान और सामाजिक समरसता का संदेश देने का प्रयास किया। हालांकि कार्यक्रम के समानांतर भाजपा जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील सिंह पटेल की होर्डिंग फाड़े जाने की घटना पूरे शहर में चर्चा का विषय बनी रही।
राजनीतिक गलियारों में इस दौरे को आगामी चुनावों के मद्देनजर ओबीसी समाज को साधने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल के समय में मुख्यमंत्री का यह दूसरा ऐसा दौरा है, जिसमें ओबीसी वर्ग के महापुरुषों और वीरांगनाओं को सम्मान देने से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
दूसरी ओर, कार्यक्रम से पहले शहर में जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील सिंह पटेल की कई होर्डिंग फाड़े जाने की घटना ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया। लोगों के बीच यह सवाल लगातार उठता रहा कि जब पूरी रात कार्यक्रम स्थल और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस का कड़ा पहरा, बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी, तब आखिर केवल पटेल समाज से जुड़े होर्डिंग ही कैसे फाड़ दिए गए।
शहर में आम लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। कई लोगों ने इसे सत्ता पक्ष के भीतर की राजनीतिक खींचतान से जोड़ते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे किसी विरोधी ने जानबूझकर यह घटना कराई हो। कुछ लोगों ने व्यंग्य करते हुए कहा कि "खिसियाई बिल्ली खंभा नोचे" की तर्ज पर राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में इस प्रकार की घटनाएं कराई जा रही हैं।
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक ओर लोधी समाज को सम्मान देने के लिए प्रतिमा का अनावरण किया गया, वहीं दूसरी ओर पटेल समाज से जुड़े प्रमुख नेता की होर्डिंग फाड़े जाने की घटना ने ओबीसी समाज के भीतर विभाजन की राजनीति को लेकर चर्चाओं को जन्म दे दिया है। जनता के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इससे सामाजिक और राजनीतिक संदेश प्रभावित हुआ है।
इस पूरे मामले पर जेडीयू की प्रदेश उपाध्यक्ष शालिनी सिंह पटेल ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार में कुछ ऐसे नेता शामिल हैं जो "फूट डालो, राज करो" की गंदी मानसिकता से राजनीति कर रहे हैं।
शालिनी सिंह पटेल ने कहा कि पूरी रात सुरक्षा व्यवस्था, पुलिस बल और बैरिकेडिंग मौजूद रहने के बावजूद केवल पटेल समाज से जुड़े होर्डिंग फाड़े जाना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि आखिर किसने यह कृत्य किया, यह जनता से छिपा नहीं है। उनके अनुसार इस प्रकार की राजनीति सामाजिक सौहार्द के लिए उचित नहीं है और यदि किसी ने व्यक्तिगत या राजनीतिक द्वेष के चलते ऐसा कराया है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
हालांकि होर्डिंग फाड़ने की घटना को लेकर प्रशासन की ओर से आधिकारिक रूप से किसी व्यक्ति या संगठन की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। ऐसे में इस मामले की पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी। वहीं शहर में यह प्रकरण पूरे दिन राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं का प्रमुख विषय बना रहा।